उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने उक्त मामले में स्पष्ट किया था कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत की गई है, तो उसकी अनुबंध सेवा को वरिष्ठता, वार्षिक वेतन वृद्धि और अन्य सेवा लाभों के लिए गिना जाना चाहिए। एकल पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वीकृत पद खाली होने के बावजूद नियमित नियुक्ति के बजाय अनुबंध पर नियुक्ति देना एक शोषक नीति है। अदालत ने माना कि यह केवल वित्तीय देनदारी से बचने और कर्मचारियों को उनके कानूनी लाभों से वंचित करने का एक तरीका है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी राज्य सरकार की समीक्षा याचिका को भी खारिज कर दिया था और एकल जज के आदेश में बदलाव करके से इन्कार कर दिया। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 जोकि 19 फरवरी 2025 को अधिसूचित हुआ है के लागू होने के कारण मामले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई गलती नहीं दिखती जिसके आधार पर समीक्षा की जाए।