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Himachal: अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि के लिए गिनने के निर्देश बरकरार, सरकार की याचिका खारिज

Wed, 18 Mar 2026 10:01 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश सरकार की ओर से दायर उस विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कर्मचारी की अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि के लिए गिनने के निर्देश दिए गए थे। 
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से दायर उस विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने कर्मचारी की अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि के लिए गिनने के निर्देश दिए गए थे। यह मामला हिमाचल प्रदेश राज्य बनाम प्रियंका नागू से संबंधित है। राज्य सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट के 16 दिसंबर 2024 और 10 अक्टूबर 2025 के आदेशों के खिलाफ एलपीए दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वे इस विशेष याचिका को खारिज कर रहे हैं, लेकिन इसमें शामिल कानूनी सवालों को भविष्य के लिए खुला रखा गया है।

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उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने उक्त मामले में स्पष्ट किया था कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत की गई है, तो उसकी अनुबंध सेवा को वरिष्ठता, वार्षिक वेतन वृद्धि और अन्य सेवा लाभों के लिए गिना जाना चाहिए। एकल पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वीकृत पद खाली होने के बावजूद नियमित नियुक्ति के बजाय अनुबंध पर नियुक्ति देना एक शोषक नीति है। अदालत ने माना कि यह केवल वित्तीय देनदारी से बचने और कर्मचारियों को उनके कानूनी लाभों से वंचित करने का एक तरीका है।
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हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी राज्य सरकार की समीक्षा याचिका को भी खारिज कर दिया था और एकल जज के आदेश में बदलाव करके से इन्कार कर दिया। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 जोकि 19 फरवरी 2025 को अधिसूचित हुआ है के लागू होने के कारण मामले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई गलती नहीं दिखती जिसके आधार पर समीक्षा की जाए।
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