अंग्रेजों के जमाने का जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जल्द ही कंप्यूटर में एक क्लिक पर मिल जाएगा। साल 1870 से 2005 तक के रिकॉर्ड को हिमाचल सरकार ऑनलाइन करने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के लिए इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन प्रमाणपत्रों का डिजिटलीकरण करेगा। कॉरपोरेशन निजी कंपनी को डिजिटलीकरण का काम सौंपेगा। प्रमाणपत्र सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है।
ब्रिटिशकाल के दौरान देश की राजधानी रही हिल्स क्वीन शिमला के नगर निगम कार्यालय में साल 1870 से जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड है। शिमला में जन्मे कई अंग्रेजों के परिवार वाले इंग्लैंड से यहां आकर प्रमाणपत्र लेते हैं। अपने पूर्वजों की निशानी जुटाने के लिए हर साल अंग्रेज यहां आते हैं। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी कई साल पुराने प्रमाणपत्र हैं। प्रदेश सरकार अब इन सभी पुराने दस्तावेजों को डिजिटल तरीके से सहेजने जा रही है।
निजी कंपनी को इसका काम सौंपा जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत सभी पुराने रिकॉर्ड स्कैन किए जाएंगे। हर प्रमाणपत्र की अलग-अलग स्कैनिंग होगी। इनका इंडैक्स बनाया जाएगा। हिंदी और अंग्रेजी भाषा में रिकॉर्ड की डाटा एंट्री की जाएगी।
इसके लिए अलग से सॉफ्टवेयर भी बनाया जाएगा। हर जिला मुख्यालय में डिजिटलीकरण का काम किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर भी यह डाटा अपलोड किया जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद विभागीय वेबसाइट पर आवेदन कर जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त किए जाए सकेंगे।
14 जनवरी को होगा कंपनी का चयन
इलेक्ट्रॉनिक डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक डीसी ने बताया कि प्रमाणपत्रों के डिजिटलीकरण के लिए 14 जनवरी को कंपनी का चयन किया जाएगा।