पूरे देश में जीएसटी लागू होने के बावजूद चूना पत्थर कारोबारियों को चूना लग रहा है। जीएसटी लागू होने पर एक ही टैक्स लगना था और एक टैक्स एक रिटर्न भरनी पड़ेगी, लेकिन चूना खान के कारोबारियों पर विभिन्न टैक्स अभी भी लागू हैं। चूना पत्थर पर अब भी अन्य टैक्स देने पड़ रहे हैं। इसकी रिटर्न भी अलग-अलग भरनी पड़ रही है। ऐसे में यह जीएसटी सिर्फ छलावा साबित हो रहा है।
हिमाचल में चूना पत्थर पर कई प्रकार के टैक्स हैं। पहले चूना पत्थर पर 5 फीसदी वैट और 2 फीसदी (सी फॉर्म पर) बाहरी राज्यों में भेजने पर सीएसटी था। वैट अधिनियम में चूना पत्थर नेगेटिव लिस्ट में रखा गया, जिस कारण हर बिक्री पर टैक्स देना पड़ता था। यहां के उद्योग राजस्थान से चूना पत्थर खरीदने को मजबूर थे।
जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों को उम्मीद थी कि अब एक टैक्स और एक रिटर्न होगी, लेकिन इसके बाद भी टैक्स कम नहीं हुआ। चूना पत्थर को 5 फीसदी में रखा गया है और नेगेटिव लिस्ट से बाहर है। बावजूद इसके व्यवसायियों को चूना पत्थर पर जीएसटी के अलावा एजीटीसी और सीजीसीआर देना पड़ रहा है।
रिटर्न भी जीएसटी और एजीटीसी अलग भरनी पड़ रही है। इसके अलावा भी चूना पत्थर पर कई प्रकार का टैक्स सरकार को देना पड़ रहा है। एजीटीसी और सीजीसीआर समाप्त करने के लिए चैंबर ऑफ कॉमर्स पांवटा और सिरमौर माइन ऑनर एसोसिएशन सतौन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।
खनन व्यवसायियों को सभी प्रकार के टैक्स की असेसमेंट हर तिमाही और सालाना तौर पर करानी पड़ती है। वहीं, डिक्लेरेशन फॉर्म भी भरने पड़ रहे हैं।
उधर, जिला सिरमौर के अतिरिक्त आयुक्त आबकारी एवं कराधान विभाग गणेश दत्त ठाकुर ने बताया कि जीएसटी आने के बाद भी एजीटीसी और सीजीसीआर को नहीं हटाया गया है। ई-डिक्लेरेशन फॉर्म तब तक रखा गया है, जब तक जीएसटी का ई वे बिल नहीं आता। ये सरकार की गाइड लाइन के अनुसार है।
सरकार को चूना पत्थर से मिलने वाला राजस्व
जीएसटी 5 फीसदी
एजीटीसी 29 रुपये प्रति मीट्रिक टन
सीजीसीआर ( फिनिशड गुड्स) 7 रुपये प्रति मीट्रिक टन
रॉयल्टी 80 रुपये (नॉन एलडी) और 90 रुपये (एलडी)
नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट रॉयल्टी का 2 फीसदी, 1 रुपये 60 पैसे प्रति मीट्रिक टन
डिस्ट्रिक्ट मिनरल्स एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट रॉयल्टी का 30 फीसदी, 24 रुपये प्रति मीट्रिक टन
ई-डिक्लेरेशन फॉर्म -1 0 रुपये प्रति ट्रिप