तिब्बती धर्मगुरु 14वें दलाई लामा ने कहा कि मनुष्य के हृदय का मूल झुकाव परोपकार की ओर होना चाहिए, क्योंकि यही मन की शांति और बेहतर स्वास्थ्य का आधार है। सोमवार को मैक्लोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर (चुगलाखंग) में आयोजित विशेष तेनझुग प्रार्थना सभा के दौरान उन्होंने भक्तों को यह आध्यात्मिक संदेश दिया। यह प्रार्थना सभा दमाई लामा की लंबी आयु के लिए आयोजित की गई। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने आंतरिक शांति पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परोपकार की भावना से न केवल मन को सुकून मिलता है, बल्कि इससे शारीरिक सुख भी प्राप्त होता है। जब हमारा मन शांत होता है तो स्वास्थ्य बेहतर रहता है, नींद गहरी आती है और हम अपनी आंतरिक क्षमताओं का सर्वोत्तम उपयोग कर पाते हैं। इस विशेष अवसर पर उन्होंने मानवता की सेवा को ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताया। यह प्रार्थना सभा दुनिया भर के पूर्व तिब्बती राजनीतिक कैदियों और ल्हासा बॉयज एसोसिएशन (स्विट्जरलैंड) की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी। समारोह के दौरान बौद्ध भिक्षुओं ने पवित्र ग्रंथों का पाठ किया और पारंपरिक अनुष्ठान किए। दलाई लामा ने इस दौरान भक्तों को दर्शन दिए और उन्हें भेंट किए गए लंबी आयु के प्रतीक चिह्नों को स्वीकार किया।