पठानिया ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य विषय डिजिटल युग में सुशासन संसाधनों का प्रबंधन, लोकतंत्र की रक्षा और नवाचार को अपनाना है। इस सम्मेलन में चर्चा के लिए तीन विषयों का चयन किया है। इसमें 30 जून को पहले विषय राज्य के विकास की तुलना में राज्य के संसाधनों के प्रबंधन में विधायिका की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। जबकि 1 जुलाई को सुबह दूसरे विषय अनुच्छेद 102 और 191 की 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल के आधार पर अयोग्यता का प्रावधान तथा इसी दिन दोपहर बाद तीसरे विषय विधान सभाओं में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग पर भी मंथन किया जाएगा। पठानिया ने कहा कि सम्मेलन में भाग लेने के लिए मंत्री परिषद सदस्यों के साथ विधानसभा के सभी सदस्यों सहित हिमाचल प्रदेश से लोकसभा तथा राज्यसभा सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया है। सभी प्रतिनिधि 29 जून को धर्मशाला पहुंचना शुरू हो जाएंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे शुभारंभ
पठानिया ने कहा कि 30 जून, 2025 को सम्मेलन का शुभारंभ लोकसभा के अध्यक्ष एवं राष्ट्रमंडल संसदीय संघ, भारत क्षेत्र के अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे, जबकि 1 जुलाई, 2025 को समापन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सिंह सुक्खू, राज्यसभा के उप सभापति डॉ. हरिवंश नारायण सिंह, हिमाचल प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान भी मौजूद रहेंगे। समापन समारोह में राज्यसभा के उप-सभापति डॉ. हरिवंश नारायण सिंह, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर मौजूद रहेंगे।
दल-बदल पर छह साल का हो निष्कासन मानदेय और सुविधाएं हों बंद : पठानिया
दल-बदल कानून के बारे में विस अध्यक्ष पठानिया ने कहा कि वह इस बारे में निर्णय ले चुके हैं और अब इससे आगे बढ़ने की जरूरत है। कोई भी प्रतिनिधि जो चुनकर आता है चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से संबंधित है या आजाद विधायक है, यह उसकी संवैधानिक कर्तव्य है कि वह पांच वर्ष तक विधानसभा और लोकसभा में अपने कर्तव्य का निर्वहन करे। उसको कहीं कानूनी, संवैधानिक अधिकार नहीं है और न आचार नीति अनुमति देती है कि वह दल-बदल करे। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे छह साल के लिए निष्कासित कर देना चाहिए और जो भी मानदेय व अन्य सुविधाएं बतौर विधायक या पूर्व विधायक मिलती हैं वह बंद कर देनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश की 10वीं अनुसूची में दलबदल विरोधी कानून के माध्यम से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के 9 सदस्यों की सदस्यता रद्द हुई है, जिसमें से तीन ही उपचुनाव में जीत सके। इसलिए इस सम्मेलन में इसको और सशक्त करने का मुद्दा रखा जाएगा। या कुछ लोगों का मत है कि इसको समाप्त करने की जरूरत है। अब सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधि क्या चाहते हैं, इस विषय पर चर्चा होगी।