10 दिन बाद सेना ने निकाला पोलैंड के पायलट का शव
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बीड़ बिलिंग से पैराग्लाइडिंग की एकल उड़ान भरने के बाद दिशा भटके पौलेंड के विदेशी पायलट का शव गुरुवार को सेना के जवानों ने बाहर निकाला। शव को क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में पोस्टमार्टम के बाद विदेशी नागरिक की पत्नी और बेटे के सुपुर्द कर दिया। विदेशी पायलट की खोजबीन में टीमों को 10 दिन लग गए, जिसमें भारतीय सेना, एयरफोर्स, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग स्थित हाई एल्टीटयूड वारफेयर स्कूल (एचएडब्ल्यूएस) के जवानों का विशेष योगदान रहा। पायलट का शव ग्लाइडर में ही फंसा था। शव को निकालने के लिए आठ दिनों तक लगातार अभियान चलता रहा, जिसमें बुधवार को सफलता मिली। डीसी डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि 23 अक्तूबर को बीड़-बिलिंग से उड़ान भरकर पोलैंड के फ्री फ्लायर 74 वर्षीय पायलट आंद्रेज विक्टर लापता हुआ था।
जहां पायलट का ग्लाइडर फंसा था, वह स्थान समुद्र तल से 3,650 मीटर ऊंचाई पर स्थित है, जो तीखी ढलाननुमा जगह थी। घटना की सूचना मिलने पर पहले निजी चौपर और उसके बाद एयरफोर्स के दो चीता हेलिकाप्टर की मदद से 27 अक्तूबर को अभियान चलाया गया। मनाली स्थित पर्वतारोहण केंद्र के विशेषज्ञों की टीम भी आई थी। इसके बाद एनडीआरएफ और एसडीआरफ की टीमों को भेजा गया, जिन्होंने जहां पायलट का शव था, उससे थोड़ी ऊपर बेस कैंप बनाया। गरुड़ कमांडो को भी बुलाया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग स्थित हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (एचएडब्ल्यूएस) के जवानों को बुलाया गया। इन जवानों ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के सहयोग से शव को 300 मीटर ऊपर पहुंचाया, जहां से शव को एयरलिफ्ट कर योल पहुंचाया गया।