800 मीटर दौड़ में भी धर्मपाल के घोड़े ने बाजी मारी। वहीं दूसरे स्थान पर उरज्ञान दोर्जे का घोड़ा रहा। धर्मपाल ने बीते वर्ष भी पहले स्थान पर बाजी मारी थी। इसके अलावा अमीचंद, गांव खाब, जिला किन्नौर के नर घोड़े को सर्वोत्तम घोड़ा और सोमकृष्ण, गांव नांन, मंडी की मादा घोड़ी को सर्वोत्तम चुना गया।
पशुपालन विभाग द्वारा बीते तीन दिनों में कुल 362 घोड़ों का पंजीकरण किया गया। मैदान में विभाग की सूचना के अनुसार इस बार सबसे मंहगा घोड़ा 51 हजार रुपये में बिका।
प्रदर्शनी के समापन अवसर पर सहायक निर्देशक डॉ. अशोक चौहान, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुबेर शर्मा, डॉ. गुलशन, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. सुरेश कपूर सहित अन्य मौजूद रहे।