जिला शिमला और सोलन के प्रमुख देवता डोमेश्वर सन्नाटा 400 से अधिक यात्राओं को पूरा करने के बाद अपने मंदिर में प्रवेश करने की परंपरा का तीन दिवसीय उत्सव का रविवार को मुख्य कार्यक्रम हुआ। तीन दिवसीय उत्सव शनिवार से शुरू हुआ है। सदियों से मनाई जा रही इस देव परंपरा को बढातर कहते हैं। उत्सव में 21 देवताओं की पूजा विधि विधान से गुठाण के ऐतिहासिक मंदिर में हुई।
इसमें प्रदेश की प्राचीन 18 रियासतों के शाही परिवार 23 साल बाद देवता महाराज की गुठाण देवठी में पहुंचे। यह कार्यक्रम देवता के प्रमुख मंदिर में चार सालों बाद प्रवेश करने की खुशी में किया जा रहा है। इसमें प्रदेश और बाहरी राज्यों से देवता के हजारों श्रद्धालु देवता का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे। पिछले वर्षों में कोरोना के चलते यह उत्सव नहीं हो पाया। इस वर्ष यह उत्सव आयोजित किया जा रहा हैं।
इस दौरान देव नृत्य चोल्टू आयोजित किया गया। मंदिर कमेटी एवं गुठाण देवठी के प्रमुख कारदार मदन वर्मा ने बताया कि समारोह के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की सहायता ली गई है। इसमें 100 से अधिक पुलिस के जवानों ने अपनी सेवाएं दीं। जाम से निपटने के लिए प्रशासन ने पहले से ही ट्रैफिक प्लान तैयार कर दिया था जो कि सफल रहा। मंदिर में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई।
कौन कौन सी रियासतें हुईं शामिल
देव परंपरा से जुड़े इस उत्सव में 18 ठकुराइयों के शाही परिवार शामिल हुए। इसमें क्योंथल, दरकोटी, कोटखाई, कुठार सेर, सोलन, घूंड, ठियोग, क्रांगला, शिला सहित अन्य रियासतें भी शामिल हैं। उत्सव में डोमेश्वर गुठाण में मान्यता रखने वाले सात खूंद भी शामिल रहेंगे। देवता के रथ पर 21 टीकों देवताओं की पोजा की जाएंगी। इसके अलावा डोमेश्वर पुडग, शडी से माहेश्वरी देवी, नाग देवता बागी, नाग देवता बासा माहोग, हिमरी, नेहरा कोटखाई, नेहरा ठियोग, नमाणा, दवांए और रावाग के डोमेश्वर देवता आमंत्रित किए गए।