गुरुवार को वीरभद्र और सुक्खू के शब्द बाणों ने बीते कुछ समय से शांत चल रही पुरानी जंग को दोबारा धार दे दी है। उधर, वीरवार को कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में कार्यकारिणी भंग के बावजूद कई पदाधिकारियों ने राठौर के दफ्तर में हाजिरी भरी।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि कार्यकारिणी भंग होने का फैसला उचित समय में लिया गया सही कदम है। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों से वह प्रदेश में पार्टी की मजबूती के लिए प्रदेश कार्यकारिणी को सही करने की बात करते रहे। उनकी इस बात को अनदेखा किया गया। यही कारण रहा कि प्रदेश में कांग्रेस कमजोर होती चली गई।
सुखविंद्र सुक्खू ने कहा कि मैंने अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी पुराने पदाधिकारी को नहीं हटाया। वीरभद्र और कौल सिंह के समय बने पदाधिकारियों को साथ लेकर काम किया।
राठौर ने लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी में नियुक्तियां की। इसमें नौ महासचिव, सात उपाध्यक्ष, 23 सचिव और करीब 70 ब्लाक अध्यक्ष बनाए। ऐसे में राठौर का यह कहना कि उन्हें टीम बनाने का मौका नहीं मिला, समझ से परे है।