एमएसीटी भूपेश शर्मा की अदालत ने सुनाया फैसला
प्रतिवादियों को 30 दिन के भीतर मुआवजे की राशि देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी।
शिमला। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क दुर्घटना में हुई दो लोगों की के बाद आश्रितों को 1.19 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
मुआवजा राशि पत्नियों, माताओं, पिता और उनके चार बच्चों में बटेंगी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश भूपेश शर्मा (मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्युनल) ने यह फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिवादी सीमा शर्मा और परीक्षित राजटा को 30 दिन के भीतर याचिका दायर करने की तारीख से प्रति वर्ष छह फीसदी ब्याज के साथ दावेदारों को भुगतान करने का आदेश दिया है।
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एमएसीटी ने दायर दो याचिकाओं में फैसला सुनाते हुए मृतकों के परिवार वालों को 1,19,27,900 रुपये देने के आदेश दिए हैं। इसमें हरी राम की दावेदार पत्नी कृष्णा देवी और तीन बच्चों को 93,18,700 और राज कमल की दावेदार पत्नी अनिता, मां लीला देवी, पिता कृष्ण लाल और बेटे को 26,09,200 रुपये की राशि देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधिकरण ने प्रतिवादी परीक्षित राजटा को यह भी र्देश दिए हैं कि मृतक के नाबालिग बच्चे को मुआवजे की राशि बतौर एफडी के तौर पर जमा करवाई जाए।
छोटा शिमला और पूह थाने के मामले
24 अक्तूबर 2022 को एनएच-05 पर जीआरईएफ कैंप नजदीक पावर हाउस पूह (किन्नौर) में बोलेरो कैंपर दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। इसमें राज कमल पुत्र कृष्ण लाल (34) निवासी ग्राम खरोटा, डाकघर कलबोग कोटखाई निवासी की मौत हो गई थी। पेशे से राज कमल विशेषज्ञ एप्पल ग्रेडर पैकर था। हादसे के समय वाहन में शलखर से घर जा रहा था। दूसरे मामले में 15 मार्च 2023 को यूएस कल्ब-शिल्ली चौक प्रतिबंधित मार्ग पर कार की टक्कर से हरी राम (57) पुत्र भगवान दास, निवासी सेट नंबर-18 ब्लॉक नंबर-25 यूएस क्लब, मूलत: गांव असतानी रोहड़ू निवासी की मौत हो गई थी। वह उच्च न्यायालय में बतौर रीडर के पद पर कार्यरत थे और हादसे के समय वह पैदल ड्यूटी पर जा रहे थे। इसके बाद मृतकों की पत्नियों ने एमएसीटी न्यायालय में उचित मुआवजे को लेकर याचिका दाखिल की थी।