राजधानी शिमला में देवदार के जंगल, जड़ी-बूटियां और वनस्पतियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं। ग्लोबल वार्मिंग और कंक्रीट के बेतहाशा इस्तेमाल से ग्रीन बेल्ट ऊपर की ओर खिसक रही है।
एक शोध के मुताबिक करीब डेढ़ सौ साल पहले अंग्रेजी राज में लगाए गए देवदार के जंगलों का दायरा लगातार कम हो रहा है। बढ़ती गर्मी के कारण निचले क्षेत्रों में नई पौध पनप नहीं पा रही है।
राष्ट्रीय पादप आनुवांशिकी ब्यूरो, नई दिल्ली के जर्म पलाज्म विभाग के अध्यक्ष और शिमला कार्यालय में प्रधान वैज्ञानिक रहे डॉ. जेसी राणा की टीम द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया है कि यहां पाई जाने वाली वनस्पतियां ऊपर की ओर सरक रही हैं।
शोध के मुताबिक सौ साल पहले शिमला की जाखू और आसपास की पहाड़ियों पर पाई जाने वाली अनेक जड़ी-बूटियां अब नजर नहीं आती हैं। ये लगातार गायब हो रही हैं। पर्यावरण में आए बदलाव से यहां देवदार की नई पौध पनप ही नहीं पा रही है।