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शोध में शिमला के इन पेड़ों को लेकर हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Mon, 01 May 2017 02:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राजधानी शिमला में देवदार के जंगल, जड़ी-बूटियां और वनस्पतियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं। ग्लोबल वार्मिंग और कंक्रीट के बेतहाशा इस्तेमाल से ग्रीन बेल्ट ऊपर की ओर खिसक रही है।
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एक शोध के मुताबिक करीब डेढ़ सौ साल पहले अंग्रेजी राज में लगाए गए देवदार के जंगलों का दायरा लगातार कम हो रहा है। बढ़ती गर्मी के कारण निचले क्षेत्रों में नई पौध पनप नहीं पा रही है। 


राष्ट्रीय पादप आनुवांशिकी ब्यूरो, नई दिल्ली के जर्म पलाज्म विभाग के अध्यक्ष और शिमला कार्यालय में प्रधान वैज्ञानिक रहे डॉ. जेसी राणा की टीम द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया है कि यहां पाई जाने वाली वनस्पतियां ऊपर की ओर सरक रही हैं। 
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शोध के मुताबिक सौ साल पहले शिमला की जाखू और आसपास की पहाड़ियों पर पाई जाने वाली अनेक जड़ी-बूटियां अब नजर नहीं आती हैं। ये लगातार गायब हो रही हैं। पर्यावरण में आए बदलाव से यहां देवदार की नई पौध पनप ही नहीं पा रही है।
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ग्लोबल वार्मिंग से खिसक रही ग्रीन बेल्ट

देवदार, बान और बुरांस के पेड़ों से ढका रहने वाला शिमला शहर धीरे-धीरे देवदार रहित हो रहा है। हर साल बड़ी संख्या में पेड़ गिर रहे हैं या फिर इन्हें अनसेफ  घोषित कर ट्री कमेटी की हरी झंडी के बाद काट दिया जा रहा है। 

शोधकर्ताओं के मुताबिक यही हाल रहा तो आने वाले कुछ दशकों में शिमला में देवदार कम दिखेंगे। टीम का कहना है कि बेशक खाली स्थानों पर देवदार के पौधे रोपे जा रहे हैं, लेकिन इनके जीवित रहने की दर काफी कम है। 

राजधानी में कई डंपिंग साइटें देवदारों के पेड़ों के बीच बनाई गई हैं। शिमला में बाईपास रोड के आसपास बनी ऐसी डंपिंग साइटों के मलबे से घिरे देवदार के पेड़ सूख रहे हैं। 

वन सचिव राजेश धर्माणी खुद इस मामले को उठा चुके हैं, लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। अंधाधुंध निर्माण के लिए भी चोरी छिपे पेड़ काटे जा रहे हैं।
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