शिक्षित बेरोजगार संघ ने बोला हल्ला, बोले-नीति न बदली तो किया जाएगा विधानसभा का घेराव
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नीति और सरकार के खिलाफ की जमकर नारेबाजी
उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा मांग पत्र अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश सरकार की गेस्ट शिक्षक भर्ती की पॉलिसी के विरोध में सोमवार को हिमाचल प्रदेश शिक्षक बेरोजगार संघ के बैनर तले उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। इसे छात्र संगठन एसएफआई ने भी समर्थन दिया।
शिक्षित बेरोजगार संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वह सालों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और सरकार ऐसी नीति ला रही है जो बेरोजगारों के साथ मजाक है। शिक्षित बेरोजगार संघ के प्रदेशाध्यक्ष बाल कृष्ण ठाकुर, उपाध्यक्ष पवन शर्मा, सचिव बंटी, सहसचिव विरेंद्र अजटा, शोधार्थी बचन, अतुल और कविता आदि ने भाग लिया। बाल कृष्ण और अन्य पदाधिकारियों ने इस प्रदर्शन में सरकार से इस युवा विरोधी नीति को वापस लेने की मांग की।
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चेताया कि यदि नीति वापस न ली तो संघ 19 दिसंबर को विधानसभा का घेराव करेगा। इसके लिए सभी जिला ईकाइयों और प्रदेशभर के शिक्षित युवाओं, छात्र संगठनों से इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जोड़ा जा रहा है। इसके बावजूद यदि सरकार पॉलिसी को वापस नहीं लेती है तो कांग्रेस के हिमाचल आने वाले शीर्ष नेताओं, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और अन्य नेताओं का घेराव होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार विधानसभा में 90 पदों पर शुरू की विभिन्न पदों की भर्ती के परिणाम तक घोषित नहीं कर पाई है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 258 पदों को 2020-21 में विज्ञापित करने के बाद साढ़े चार करोड़ से अधिक की भारी भरकम फीस बेरोजगार युवाओं से वसूलने के बाद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। यह युवाओं के साथ धोखा है। बाल कृष्ण ने कहा कि आउटसोर्स भर्तियों के खिलाफ बेरोजगार संघ के न्यायालय जाने के बाद इस पर रोक लगी है, विवि में रुकी भर्तियों के मामले को लेकर भी संघ न्यायालय गया है।
सरकार बताए किसको दी तीस हजार नौकरियां
संघ के पदाधिकारियों ने बेरोजगार युवाओं के साथ प्रदर्शन के दौरान पॉलिसी और प्रदेश सरकार के विरोध में नारेबाजी भी की और उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगपत्र सौंपा। बाल कृष्ण ठाकुर,पवन शर्मा, बंटी, विरेंद्र अजटा और अन्य संगठन नेताओं ने कहा कि दो साल पूरे कर चुकी प्रदेश सरकार जो तीस हजार सरकारी नौकरियां देने का दावा कर रही है, बताए कि कितनी स्थायी नौकरियां दीं। दो सालों से एचपीआसीए बंद है फिर किस एजेंसी के माध्यम से भर्तियां की गई हैं। उन्होंने सरकार की आउटसोर्स आधार पर की गई भर्तियों का विरोध कर स्थायी रोजगार देने की मांग की।
गेस्ट शिक्षक नीति युवाओं से धोखा : एसएफआई एसएफआई के प्रदेश सचिव दीनित देंटा ने कहा कि सरकार की गेस्ट टीचर पॉलिसी पूरी तरह से शिक्षित और बेरोजगार युवा विरोधी है। इसके खिलाफ युवाओं में आक्रोश है। युवाओं ने भ्रष्टाचार, बढ़ती बेरोजगारी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए कांग्रेस को पूरा समर्थन देकर सत्ता में लाया था लेकिन सरकार अब सबकुछ उल्टा कर रही है। एसएफआई के प्रदेश सचिव दीनित देंटा ने कहा कि वर्ष 2013 में गेस्ट टीचर की तर्ज पर स्कूल में खाली चल रहे पदों को भरने के लिए एसएमसी नीति लाई गई। लेकिन अब इसे सहन नहीं किया जाएगा।