मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और बेटी की संपत्ति जब्त करने की ईडी की कार्रवाई पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।
हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और बेटी की संपत्ति जब्त करने की ईडी की कार्रवाई पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाने के लिए 26 अप्रैल की तारीख तय की है। अदालत ने इस अवधि में याचिकाकर्ताओं की संपत्ति की कुर्की और उनके खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है।
अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि ईडी को इस मामले में दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की इतनी क्या जल्दी थी? मुख्य न्यायमूर्ति जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बेहद जल्दबाजी दिखाने के लिए कड़ी फटकार लगाई।
ईडी ने सोमवार को इस मामले में अपना जवाब दाखिल किया था, लेकिन यह कोर्ट के रिकार्ड पर नहीं आ सका था। कोर्ट ने सुनवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी थी। इस बीच ईडी ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली। ईडी ने याची अपराजिता कुमारी और विक्रमादित्य सिंह की याचिका का जवाब देते हुए अपने हलफनामे में कहा कि उन दोनों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया है।
गत 23 मार्च को प्रोविजनल कुर्की आदेश जारी करने के बाद एजेंसी के पास काफी समय था। एजेंसी ने याचिका दायर होने के बाद याचियों को क्यों नामजद किया। खंडपीठ ने एजेंसी को फटकार लगाते हुए यह भी कहा कि उनके पास ऐसे अनेक मामले हैं तो वह इतना जल्दी उनमें कार्रवाई क्यों नहीं करती।
वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य सिंह और बेटी अपराजिता कुमारी दोनों ने ईडी की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी संपत्ति जब्त करने के फैसले को चुनौती दी है। ईडी ने अपराजिता की करीब 15.85 लाख रुपये की अचल संपत्ति और विक्रमादित्य की तकरीबन 62.80 लाख रुपये की संपत्ति को जब्त किया है।