मुख्य सचिव पद के दावेदार रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीपक सानन और विनीत चौधरी को हिमाचल सरकार ने प्रधान सलाहकार बना दिया है। वीसी फारका को मुख्य सचिव बनाने के बाद दोनों अधिकारी नाराज थे और इस बात पर अडे़ थे कि वे कनिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट नहीं करेंगे।
केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ के फैसले के बाद मंगलवार को सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक सानन को प्रधान सलाहकार प्रशासनिक सुधार एवं प्रशिक्षण के पद पर नियुक्ति दी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी को प्रधान सचिव जन शिकायत निवारण के पद पर तैनात किया है।
राज्य सरकार ने दोनों एक्स काडर पदों को सृजित करने के बाद ये नियुक्तियां दी हैं। इन दोनों अधिकारियों को 2 लाख 25 हजार रुपये मासिक वेतन मिलेगा। यह उल्लेखनीय है कि दीपक सानन इसी महीने रिटायर हो रहे हैं, जबकि अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी की सेवानिवृत्ति अगले साल सितंबर महीने में होनी है। वीसी फारका को मई 2016 में मुख्य सचिव बनाया था।
वरिष्ठता का हवाला देकर इन दोनों अधिकारियों ने मुख्य सचिव के लिए दावेदारी ठोकी थी। ये दोनों अधिकारी फारका की नियुक्ति से नाराज चल रहे थे और लंबे समय से छुट्टी पर थे। फारका से वरिष्ठ रहीं एक अन्य अतिरिक्त मुख्य सचिव उपमा चौधरी भी इन दोनों अधिकारियों के साथ अवकाश पर चली गई थीं। विनीत चौधरी की पत्नी उपमा चौधरी बाद में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चली गईं।
दीपक सानन 1982 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। विनीत चौधरी भी इसी बैच के उनसे कनिष्ठ अधिकारी हैं। उपमा चौधरी 1983 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, जबकि वीसी फारका 1983 बैच में उपमा चौधरी के बाद ही वरिष्ठता में आते हैं।
वीसी फारका मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी अधिकारियों में हैं। हाल ही में केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को दोनों अधिकारियों को इस तरह के पदों पर तैनात करने के निर्देश दिए थे।
उधर, नई नियुक्ति पर दीपक सानन ने कहा कि उन्होंने ज्वाइनिंग दे दी है। ये नियुक्ति कैट के फैसले के बाद दी गई है। अगर सरकार पहले ही ऐसा कर देती तो केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में जाने की नौबत नहीं आती।