प्रदेश हाईकोर्ट ने 75 फीसदी सुनने में दिव्यांग सहायक अभियंता को 58 वर्ष की बजाय 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृति करने के प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया है। आईपीएच विभाग ने ट्रिब्यूनल के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार किसी भी तरह के शारीरिक रूप से विकलांग कर्मचारियों में भेदभावपूर्ण नीति अपनाकर उनकी रिटायरमेंट आयु निर्धारित नहीं कर सकती।
सरकार का कहना था कि 29 मार्च 2013 को जारी सरकारी ज्ञापन के अनुसार केवल नेत्रहीन कर्मचारियों की आयु सीमा 58 से 60 वर्ष निर्धारित की गई है। अन्य विकलांगों के लिए सरकार ने रिटायरमेंट उम्र 58 वर्ष ही रखी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने राज्य सरकार के 29 मार्च 2013 को जारी कार्यालय ज्ञापन को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर भेदभावपूर्ण माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विकलांगों की एक अपनी श्रेणी है।
इस श्रेणी के लोंगों को उनकी विकलांगता के आधार पर आगामी विभाजित नहीं किया जा सकता। सभी विकलांगों के साथ एक समान व्यवहार करते हुए उनमें भेदभाव गलत व न्यायसंगत नहीं है।