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अल्पसंख्यक आयोग ने तलब किए उपायुक्त कुल्लू और नप ईओ

Thu, 06 Dec 2018 09:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
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अल्पसंख्यक आयोग दिल्ली ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित परविंद्र सिंह के एक मामले में उपायुक्त कुल्लू और नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) को तलब किया है। 13 दिसंबर को उपायुक्त व ईओ को पेशी के लिए नई दिल्ली बुलाया गया है। मामले में हरचरण सिंह फौजी के बेटे परविंद्र की शिकायत पर आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है।  कुल्लू में पत्रकारों से बातचीत में परविंद्र सिंह ने कहा कि 1964 में उनके पिता ने नगर परिषद से प्लॉट नंबर-8 लीज पर लिया हुआ था। 1984 में उनके पिता सिख विरोधी दंगे का शिकार हुए और उनकी दुकान को लूट लिया गया।

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पिता को पीटकर भीड़ अधमरा कर छोड़ कर भाग गई। 1992 में लक्कड़ मार्केट में नौ दुकानें जल गईं, जिसमें उनका मकान व दुकान भी जले। उनका करीब दो लाख का नुकसान हुआ। इसके बाद से अब तक नगर परिषद ने उन्हें लीज पर ली गई जगह नहीं दी है। कई बार मामले को नगर परिषद व उपायुक्त के समक्ष उठाया गया। वर्ष 1994 में नई मार्केट बनने के बाद उन्हें प्लॉट की दुकान/मकान वापस नहीं किया गया। जबकि पुरानी मार्केट के आठ अन्य लोगों को नई मार्केट में जगह दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन व नगर परिषद के अधिकारी इस मामले को लेकर कई सालों से टालमटोल ही कर रहे हैं।

इससे आहत होकर उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का दरवाजा खटखटाया है। आयोग ने इस संबंध में डीएम कुल्लू से एक रिपोर्ट मांगी थी। इस पर एडीएम कुल्लू की तरफ से एमसी कुल्लू को पत्र लिखकर अपेक्षित रिपोर्ट मांगी गई। आयोग की तरफ से रिमांइडर भी भेजा गया, लेकिन कोई रिपोर्ट नहीं मिली। जिस पर अब कड़ा संज्ञान लेते हुए आयोग ने 13 दिसंबर को उपायुक्त और नगर परिषद ईओ को बोर्ड ने तलब किया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता फौजी हरचरण सिंह ने देश की सेना में 1946 से लेकर 1956 तक देश की सेवा की है।
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मामले से आहत होकर परविंद्र ने कहा कि पिता को बेहतर कार्य के लिए मिले मेडल को उपायुक्त को वापस किया जाएगा। इस दौरान पीडी आजाद जोनल अध्यक्ष मानव अधिकार, सरदार महेंद्र सिंह लांबा, इंद्रपाल सिंह व अन्य मौजूद रहे। उधर, डीसी यूनुस ने कहा कि नगर परिषद का जवाब आयोग को भेज दिया गया है। आवश्यक दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश किए जाएंगे।फौज में बतौर सूबेदार फौजी हरचरण सिंह को देश सेवा में बेहतर कार्य करने के लिए में 1947 में मेडल मिला था। हरचरण सिंह तोप चलाते थे। तोप के गोले की आवाज के कारण उनकी सुनने की क्षमता कम हो गई। 10 साल तक देश की सेवा करने के बाद उन्होंने 1956 में मेडिकल रिटायरमेंट ले ली थी।

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