हिमाचल के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल(आईजीएमसी) शिमला में आठ दिनों से मुर्दाघर में रखे कोरोना पॉजिटिव मृतक के शव को लेने के लिए परिवार का कोई भी सदस्य नहीं पहुंचा है। हालांकि, आईजीएमसी प्रबंधन ने 62 वर्षीय कोविड पॉजिटिव व्यक्ति की मौत की सूचना उसके बेटे को भी दी थी, लेकिन पैसा ना होने की बात कह कर बेटे ने फोन काट कर बंद कर दिया। लिहाजा आठ दिनों बाद भी शव का दाह-संस्कार ना होने के चलते अब आईजीएमसी प्रबंधन की चिंता बढ़ना शुरू हो गई है।अस्पताल प्रबंधन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखा है, ताकि नियमों के तहत मृतक का दाह-संस्कार किया जा सके। बताया जा रहा है कि कोविड पॉजिटिव को नाहन से रेफर करके आईजीएमसी लाया गया था। उस वक्त मरीज का बेटा भी साथ था, लेकिन 22 अक्टूबर को मरीज की मौत के बाद बेटा अस्पताल से चला गया।
मौत की सूचना जब बेटे को दी गई तो उसने पैसा ना होने की बात कही और कहा कि अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर पर शव का दाह-संस्कार कर ले। इसके बाद से मृतक के बेटे का फोन बंद आ रहा है। अस्पताल प्रबंधन बार-बार उक्त मोबाइल नंबर पर कॉल कर रहा है लेकिन फोन बंद है। इससे अस्पताल प्रबंधन के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। क्योंकि अगर शव का दाह-संस्कार कर लिया जाता है और बाद में परिजनों की ओर से बॉडी क्लेम करने पर दिक्कत पैदा हो सकती है। इसलिए अब प्रशासन को इस बाबत सूचना दी गई है, ताकि इसका हल निकाला जा सके। वहीं, आईजीएमसी कॉलेज प्राचार्य डॉ. रजनीश पठानिया ने कहा कि कोरोना पॉजिटिव मृतक के शव के बारे में पत्र के माध्यम से मामला शहरी एसडीएम को अवगत करवाया गया है।
क्या कहता है प्रशासन
एसडीएम शिमला शहरी मंजीत शर्मा ने बताया कि आईजीएमसी में एक कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति की मौत हुई है। लेकिन मृतक का बेटा यहां से चला गया है और उसका मोबाइल भी बंद आ रहा है, जिसके चलते दाह-संस्कार में देरी हो रही है। मृतक का पूरा पता नहीं है, ऐसे में परिजन के संपर्क नंबर को ट्रेस किया जा रहा है। पुलिस को भी इसकी जानकारी दे दी गई है, ताकि आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा सके।