पंचायतीराज विभाग के सचिव सीपाल रासु की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह नियम उन सभी निजी व्यक्तियों पर लागू होगा जो पंचायतों के माध्यम से चल रहे विकास कार्यों में शामिल हैं।
पंचायती राजसंस्थानों के कार्यों में अगर भ्रष्टाचार की शिकायतें आती हैं तो जिला उपायुक्त सीधे इन मामले में कार्रवाई कर सकेंगे। इससे पहले इस संबंध में स्पष्टता नहीं होने के कारण कई मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती थी। पंचायतीराज विभाग के सचिव सीपाल रासु की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह नियम उन सभी निजी व्यक्तियों पर लागू होगा जो पंचायतों के माध्यम से चल रहे विकास कार्यों में शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।
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विकास कार्यों में अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायती राजसंस्थानों में कार्य कर रहे निजी व्यक्तियों जैसे ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ भ्रष्ट आचरण संबंधी मामलों में कार्रवाई को स्पष्ट और प्रभावी बनाने के लिए अहम अधिसूचना जारी की है। अब संबंधित जिले के उपायुक्त को हिमाचल प्रदेश विशिष्ट भ्रष्ट आचरण निवारण अधिनियम के तहत लिखित रिपोर्ट जारी करने का सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है। जिला स्तर पर उपायुक्त को यह अधिकार दिए जाने से शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई संभव हो सकेगी। इससे पंचायतों में चल रहे निर्माण और अन्य विकास कार्यों की निगरानी भी सशक्त होगी।