सिविल अस्पताल नादौन के स्वास्थ्य अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए मृतक मोनू के परिजनों ने जिलाधीश हमीरपुर से न्याय की गुहार लगाई है। मृतक युवक के पिता देशराज ने कहा कि अस्पताल प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने उन्हें बेटे के अस्पताल में उपचाराधीन होने की कोई सूचना नहीं दी।
इसके अलावा सर्दियों का मौसम होने के बावजूद उनके बेटे को निर्माणाधीन भवन में ठहराया गया। लेकिन यहां भी घायल बेटे का सही उपचार नहीं किया गया, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। शर्मसार करने वाले इस मामले पर उपायुक्त हमीरपुर ने कड़ा संज्ञान लिया
है। उपायुक्त मदन चौहान ने सीएमओ हमीरपुर डॉ. सावित्री कटवाल से इस मामले में जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। उपायुक्त ने कहा कि अगर अस्पताल प्रशासन और पुलिस विभाग की कोताही सामने आई तो सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मृतक मोनू का परिवार बीपीएल से संबंध रखता है। 32 वर्षीय मृतक मोनू मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करता था। उनके पिता देेशराज काफी बुजुर्ग हैं और एक आंख से दिखाई नहीं देता है। माता भी घर का काम करके समय बीताती हैं। मोनू का एक बड़ा भाई है वह भी मजदूरी करता है। देशराज ने जिला प्रशासन से न्याय न मिलने पर मुख्यमंत्री और प्रदेश उच्च न्यायालय में मामले को उठाने की बात कही है।
यह है मामला
बीते वीरवार को दोपहर एक बजे भड़ोली गांव में नेशनल हाईवे के किनारे मझियार गांव का 32 वर्षीय युवक मोनू घायल अवस्था में पड़ा था। घायल को एंबुलेंस के माध्यम से नादौन सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां चिकित्सकों ने मरीज को ड्रिप लगाया। लेकिन पीड़ा के कारण वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा। बताया जा रहा है कि मोनू ने कोई नशा भी कर रखा था।
यहां उपचाराधीन अन्य मरीजों की शिकायत पर अस्पताल प्रशासन ने मोनू को पास के निर्माणाधीन बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया। जिस कमरे में मोनू को भर्ती किया गया, वहां न तो खिड़की और न दरवाजे थे। चोरों ओर से खुली ठंडी हवा आ रही थी। शुक्रवार सुबह मोनू की मौत हो गई। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने मृतक के अर्धनग्न शव पर कफन तक नहीं डाला। पुलिस भी सूचना के बावजूद मौके पर नहीं पहुंची।