जमा दो आर्ट्स की मेरिट में छठे स्थान पर आई हिमाचल के ऊना जिले के चुरड़ी स्कूल की पूजा और दसवें स्थान पर आई कोमल सफलता से गदगद हैं। हालांकि उन्हें ये भी मलाल है कि वे विज्ञान विषय में पढ़ाई नहीं कर पाईं। उनका कहना है कि चुरड़ी स्कूल में मात्र कला संकाय में पढ़ाई का प्रावधान है। अभी तक उनके स्कूल में साइंस और कॉमर्स की कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। अगर स्कूल में साइंस की पढ़ाई करने का प्रावधान होता तो वह आर्ट्स में दाखिला नहीं लेतीं। छात्राओं ने बताया कि साइंस में दाखिला लेने के लिए उन्हें घर से 10 से 12 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा था। फिर उन्होंने आर्ट्स में ही दाखिला लेना बेहतर समझा।
छात्राओं का कहना है कि पहले उनकी डॉक्टर और सीए बनने की इच्छा थी। चुरड़ी स्कूल कि ये दोनों छात्राएं निर्धन परिवारों से हैं। पूजा का परिवार खेतीबाड़ी करता है और कोमल के पिता स्कूल बस चलाते हैं। पूजा ने बताया कि उसके घर से स्कूल की दूरी 3 किलोमीटर है। इस उपलब्धि के बाद वह कॉलेज में दाखिला लेगी। वह आईएएस बनना चाहती है।
दूसरी ओर इसी स्कूल की मेरिट में 10वां स्थान पाने वाली कोमल कहना है कि वह सात से आठ घंटे तक कुछ अलग करने के लिए पढ़ती थी। इस बीच उसके माता-पिता और स्कूल के प्रवक्ता रमन उनका मार्ग दर्शन करते थे। कोमल ने कहा कि वह ग्रेजुएशन के बाद आईएएस बनना चाहती हैं। कोमल ने बताया कि उसका और उसकी सहपाठी पूजा का कंपीटीशन चलता रहता था। जमा दो के परिणाम आने के बाद जिला भर में सरकारी स्कूल चुरड़ी स्कूल की इन दो छात्राओं की सफलता के चर्चे लोगों की जुबान पर हैं। दोनों छात्राओं का कहना है कि अगर कड़ी मेहनत लगन के साथ पढ़ाई की जाए तो मंजिल जरूर मिलती है।