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हिमाचल विधानसभा: अतिक्रमणकारी परिवार की बहू भी नहीं लड़ पाएगी पंचायत चुनाव, विरोध के बीच संशोधन विधेयक पारित

Thu, 03 Sep 2026 05:58 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 संशोधन के तहत वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले परिवार के सदस्य की बहू भी पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगी। भाजपा विधायकों ने इस प्रावधान को महिलाओं को चुनाव से वंचित करने वाला बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। वहीं, पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि यदि बहू परिवार की जमीन की कानूनी वारिस बनती है तो संपत्ति से जुड़ी देनदारियों की जिम्मेदारी भी उसकी होगी। ऐसे में वह भी चुनाव नहीं लड़ सकती है।
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हिमाचल विधानसभा शिमला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के विरोध के बीच हिमाचल प्रदेश पंचायती राज द्वितीय संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया। संशोधन के तहत वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले परिवार के सदस्य की बहू भी पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगी। भाजपा विधायकों ने इस प्रावधान को महिलाओं को चुनाव से वंचित करने वाला बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। वहीं, पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि यदि बहू परिवार की जमीन की कानूनी वारिस बनती है तो संपत्ति से जुड़ी देनदारियों की जिम्मेदारी भी उसकी होगी। ऐसे में वह भी चुनाव नहीं लड़ सकती है। 

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ससुर ने अतिक्रमण किया तो उसकी सजा बहू को क्यों: रणधीर
गुरुवार को विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि आचार संहिता के बीच पंचायत चुनाव के नामांकन से एक दिन पहले अध्यादेश लाने का क्या उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि परिवार की परिभाषा में पहले पुत्रवधू शामिल नहीं थी, लेकिन छह मई को इसमें बदलाव कर पुत्रवधू को भी इसके दायरे में ला दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ससुर या दादा ने शादी से पहले अतिक्रमण किया है तो उसकी सजा बहू को क्यों दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं को यह तक पता नहीं होता कि जिस परिवार में उनकी शादी हो रही है, वहां जमीन पर अतिक्रमण का मामला है। ऐसे में उन्हें चुनाव लड़ने से रोकना उचित नहीं है। उन्होंने इसे महिलाओं को चुनाव से वंचित करने के लिए लक्षित संशोधन बताया।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने ये कहा
भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि जिस व्यक्ति ने अपराध नहीं किया, उसे चुनाव लड़ने से रोकना उचित नहीं है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले सरकार पंचायत चुनाव करवाने को तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी। आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद अध्यादेश कैसे लाया जा सकता है। यदि विधेयक आज पारित हो रहा है तो इसे पिछली तारीख से लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी। जयराम ने कहा कि किसी बेटी को यह कैसे मालूम होगा कि जिस परिवार में उसकी शादी होने जा रही है, वहां जमीन पर अतिक्रमण का मामला है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान कानून की कसौटी पर टिकने वाला नहीं है और सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।
 
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अनिरुद्ध ने किया पलटवार, पूछा-विपक्ष अतिक्रमण के पक्ष में है या खिलाफ
अनिरुद्ध सिंह ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि विपक्ष अतिक्रमण के पक्ष में है या खिलाफ। उन्होंने कहा कि कुछ प्रतिनिधिमंडल उनसे मिले थे। कई ऐसे लोग हैं, जो खुद चुनाव नहीं लड़ पा रहे और अब परिवार की बहू को चुनाव लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री ने सवाल किया कि यदि महिला परिवार की जमीन की कानूनी वारिस बनती है तो क्या वह उस संपत्ति की देनदारियों की जिम्मेदार नहीं होगी। उन्होंने कहा कि शहरी निकायों में ऐसा प्रावधान पहले से लागू है और अब पंचायतों में भी इसे लागू किया गया है। अतिक्रमण को बढ़ावा न मिले, इसलिए अध्यादेश लाया गया था। आचार संहिता के दौरान कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े निर्णय नहीं लिए जा सकते, लेकिन कानून में बदलाव किया जा सकता है। इसके बाद सदन ने विधेयक को पारित कर दिया।
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