प्रदेश सरकार तथा भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में नृत्योत्सव वीरवार को शुरू हो गया। भारत की पूर्व ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला की 150वीं जयंती पर हो रहे इस कार्यक्रम में कई बड़े कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत कथक केंद्र दिल्ली के कलाकारों के आह्वान से हुई। इसमें कलाकारों ने मिश्र छंद ताल में कथक नृत्य के माध्यम से गणेश स्तुति की।
गोपालाष्टकम में शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से भगवान कृष्ण की स्तुति की गई। तराना प्रस्तुति में संगीत के माध्यम से भावों को कला के माध्यम से सामने पेश किया। द डिवाइन फीट प्रस्तुति में दीप्ति भल्ला ने भगवान विष्णु की कालिया नाग पर जीत को नृत्य के माध्यम से दर्शाया।
नृत्योत्सव के तहत चेन्नई के लक्ष्मी पार्थ सारथी ‘मधुर भक्ति’, किरण सहगल एवं पल्लवी रामायण पर आधारित ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति देंगी। इसके अतिरिक्त सोनल मानसिंह तथा नई दिल्ली के सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांस के कलाकार ‘वैन दी गॉड्स मीट’ पर आधारित नृत्य भी प्रस्तुत करेंगे।
मां से सीखा नृत्यः दीप्ति
दीप्ति ओमचारी भल्ला ने अपनी मां डा. लीला ओउमचारी से नृत्य की दीक्षा ली है। कर्नाटक म्यूजिक में पीएचडी कर चुकी, दिप्ति इससे पूर्व राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। मौजूदा समय में वे दिल्ली विवि में प्रोफेसर हैं। त्रिकला गुरुकुल में नृत्य सीखाने का कार्य भी कर रही हैं। इन्हें केरला संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।