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Cyber Crime :  ठगी में इस्तेमाल हो रहे हैं हिमाचल के 2100 बैंक खाते, साइबर अपराधी नाबालिगों को बना रहे मोहरा

Sat, 12 Apr 2025 07:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/धर्मशाला

सार

साइबर ठगी के लिए प्रदेश के लोगों के सैकड़ों सिमकार्ड और हजारों बैंक खाते इस्तेमाल हो रहे हैं। हिमाचल पुलिस की ही मानें तो प्रदेश के लोगों के 2,100 बैंक खाते और 230 से ज्यादा सिमकार्ड ठगी में इस्तेमाल होने की सूचना है।
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Cyber crime - फोटो : Freepik
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विस्तार
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साइबर ठग हिमाचल के भोले-भाले लोगों को अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर ठगी के लिए प्रदेश के लोगों के सैकड़ों सिमकार्ड और हजारों बैंक खाते इस्तेमाल हो रहे हैं। हिमाचल पुलिस की ही मानें तो प्रदेश के लोगों के 2,100 बैंक खाते और 230 से ज्यादा सिमकार्ड ठगी में इस्तेमाल होने की सूचना है।

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धोखाधड़ी से लोगों के दस्तावेज लेकर म्यूल अकाउंट खोले जा रहे हैं। कई लापरवाही में, तो कई झांसे में फंस रहे हैं। चंद रुपयों का लालच देकर नाबालिगों को भी साइबर अपराध में मोहरा बनाया जा रहा है। धर्मशाला में हाल ही में एक नाबालिग को पकड़ा गया, जिसके पते पर साइबर ठग किसी और के खाते से ऑनलाइन शापिंग कर सामान भेजते थे।
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हिमाचल में हो रही साइबर ठगी के मामलों की जांच में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के हजारों लोगों के बैंक खातों और सिमकार्ड को अपराधी इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर ठगी के मामलों में गिरफ्तार 34 में से ज्यादातर आरोपी वो हैं, जिनके खातों का इस्तेमाल हुआ है। पुलिस के मुताबिक अभी तक ऐसे करीब 230 सिमकार्ड और 2,100 बैंक खातों की पहचान की गई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन नंबरों का इस्तेमाल विदेशों में बैठे ठग भी कर रहे हैं। साइबर ठगी का नेटवर्क सरहद पार तक फैला है। ज्यादातर मामलों में जब तक पुलिस को शिकायत मिलती है, तब तक ठगी की रकम एक खाते से दूसरे में ट्रांसफर कर निकाल ली जाती है।

हिमाचल के 230 सिमकार्ड और 2100 बैंक खातों का साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल की सूचना है। राज्य में दर्ज साइबर ठगी के मामलों की जांच में सामने आया है कि कई बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए हुआ है। लोगों से अपील है कि वे संचार साथी बेवसाइट पर जाकर यह जांच करें कि उनकी आईडी पर ऐसे नंबर तो नहीं चल रहे हैं, जिनकी उन्हें जानकारी नहीं है। ऐसा होने पर वह लोग फौरन इसी वेबसाइट पर ऐसे नंबर ब्लॉक कर सकते हैं। 
- मोहित चावला, डीआईजी साइबर क्राइम सेल

म्यूल खातों का विदेशों से हो रहा संचालन
जांच में पता चला है कि चालू और बचत खाते टेलीग्राम व फेसबुक के माध्यम से खोजे जा रहे हैं। इन म्यूल खातों को विदेशों से संचालित किया जा रहा है। म्यूल खातों की मदद से अवैध भुगतान का गेटवे बनाकर इसे फर्जी इन्वेस्टमेंट साइटों, ऑफशोर सट्टेबाजी, जुए से जुड़ी साइटों, ट्रेडिंग प्लेटफार्म आदि पर जमा हुई राशि प्राप्त करने के लिए दिया जाता है।

पार्सल के बदले नाबालिग को देते कुछ पैसा, पंजाब से हर हफ्ते आता व्यक्ति 
हरियाणा के एक व्यक्ति ने शिकायत की कि उसके बैंक खाते से 70 हजार रुपये ऑनलाईन शॉपिंग हुई है, जबकि उसने कुछ भी नहीं खरीदा। साइबर क्राइम सेल ने जब मामले की जांच की तो पता चला कि यह पार्सल हिमाचल के धर्मशाला में एक नाबालिग के नाम पर डिलीवर हुआ। जब नाबालिग से पूछताछ हुई तो उसने बताया कि पंजाब में बैठा एक व्यक्ति उसे पार्सल लेने के लिए कहता था और बदले में कुछ पैसे देता था। हर हफ्ते पंजाब में बैठे ठगों के गिरोह का कोई प्रतिनिधि यहां आता और सारे पार्सल ले जाता था। 

  • मामला सामने आने पर नाबालिग के परिजनों ने हरियाणा के व्यक्ति से ऑनलाईन शापिंग के नाम पर खाते से निकले 70 हजार रुपये की रकम देकर इस मामले से पीछा छुड़ाया। पैसे वापस मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने भी शिकायत वापस ले ली। 
  • एएसपी कांगड़ा हितेश लखनपाल ने बताया कि नाबालिग ने कभी ऑनलाइन शॉपिंग नहीं की थी, उसे केवल पार्सल प्राप्त करने के बदले में रुपये मिलते थे। 

लेयर वन और टू बनाकर ठगी की रकम कर रहे खुर्दबुर्द

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साइबर अपराधी ठगी की रकम को निकालने के लिए कई बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल की जा रही है। मजदूरों, रेहड़ी वालों और निरक्षर लोगों के दस्तावेज लेकर बैंक खाते खुलवाए जा रहे हैं। इन्हें लेयर वन, टू और थ्री में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे प्रदेश से बाहर बैठे अपराधियों तक पुलिस नहीं पहुंच पा रही है।

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