सोलह शृंगार कर महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखेंगी व्रत
शाम 5:57 से रात 7:11 बजे तक रहेगा करवा पूजा का शुभ मुहूर्त
दीक्षा सरोय
शिमला। करवा चौथ के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। शुक्रवार को शिमला में चांद का दीदार शाम 8:07 बजे होगा। करवा चौथ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5:57 बजे से शुरू होगा और रात 7:11 बजे तक रहेगा।
इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शिव परिवार की पूजा-अर्चना करती हैं। यह व्रत सुबह सरगी खाने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर शुरू किया जाता है और शाम को चंद्रोदय के बाद खोला जाता है। इस वर्ष नई दुल्हनों के लिए पहला व्रत रखने और व्रत का उद्यापन करने के लिए अत्यंत शुभ योग है। इस वर्ष करवा चौथ व्रत की चतुर्थी तिथि 9 अक्तूबर को रात 10:54 बजे से शुरू होगी और 10 अक्तूबर को शाम 7:38 बजे तक रहेगी और चांद के दीदार के बाद पूजा कर व्रत खोल सकते हैं। शिमला में सुबह 6:21 बजे सूर्योदय हो जाएगा। इस दिन महिलाएं नई दुल्हन की तरह सोलह शृंगार करती हैं और निर्जल व्रत रखती हैं। इसके बाद शाम को चंद्रमा की पूजा कर अपने पति की दीर्घायु का वरदान मांगकर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। इसकी कहानी वीरावती से जुड़ी है। इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की वीरावती नाम की बेटी थी। उसके सात भाई थे। जब उसने पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा, तो दिनभर भूखी-प्यासी रहने की वजह से वह बहुत कमजोर हो गई। ऐसे में भाइयों से बहन की ऐसी हालत नहीं देखी गई। उन्होंने अपनी बहन का व्रत खुलवाने के लिए पहाड़ी पर दीपक जलाकर चांद जैसा दृश्य बना दिया। वीरावती ने उसे सचमुच में चांद समझ लिया और भाइयों की बातों में आकर व्रत खोल लिया। इससे उसके पति की मृत्यु हो गई। यह देखकर वह अपने पति को बचाने के लिए सच्चे मन से मां पार्वती की पूजा करने लगी। उसने पूरे साल की चौथ (चतुर्थी तिथि) का व्रत रखा और करवा चौथ के दिन व्रत रखने पर करवा यानी माता पार्वती उससे प्रसन्न हो गईं। उन्होंने वरदान स्वरूप उनके पति को फिर से जीवित कर दिया। तब से महिलाएं श्रद्धा और विश्वास के साथ करवा चौथ का व्रत रखती हैं, ताकि उनके पति की आयु लंबी हो और जीवन में खुशहाली बनी रहे।
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व्रत आरंभ और उद्यापन के लिए अत्यंत शुभ है तिथि
राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि इस वर्ष करवा चौथ की तिथि अत्यंत शुभ है इस दिन नवविवाहित महिलाएं व्रत आरंभ भी कर सकती हैं और व्रत के उद्यापन के लिए भी यह तिथि अत्यंत शुभ है। उन्होंने बताया कि व्रत का नियम है कि सात्विक विचार रखें और व्यर्थ के वार्तालाप से बचें और भगवान भोलेनाथ, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय का ध्यान करें और मंत्रजाप करें। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाएं निर्जल व्रत न रखें, पांच महीने से ज्यादा का गर्भ होने पर एक समय भोजन या फलाहार जरूर करें।
ज्योतिषाचार्य मस्तराम शर्मा ने बताया कि इस वर्ष शिमला में चंद्रोदय शाम 8:07 बजे होगा और पूजा का शुभ मुहूर्त 5:57 बजे से 7:11 बजे तक रहेगा। यह व्रत सौभाग्यवती महिलाएं पति की लंबी आयु करती हैं लेकिन कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। करवा चौथ पर पूजा में सास के लिए बायना रखा जाता है। इसमें पूरियां, मीठा, सुहाग का सामान, कपड़े शामिल होते हैं। इसके अलावा पूजा में करवे रखना जरूरी है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। करवा चौथ के लिए मिट्टी का बना हुआ करवा, चीनी का बना हुआ करवा, रौली, सिंदूर, कलावा, पंचामृत, फल, कपूर, घूप बत्ती, गंगाजल, चावल, दीपक, रूई, कलावा, बताशे, पंच मेवा आदि का इस्तेमाल होता है।
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करवा चौथ से पहले महिलाओं ने रचाई मेहंदी, रिज, मालरोड और बाजारों में उमड़ी भीड़
करवा चौथ पर्व से पहले शहर के मालरोड, शेर-ए-पंजाब, टका बेंच और झांसी पार्क के पास महिलाओं ने हाथों में अपने पति के नाम की मेहंदी रचाई। इस दौरान जगह-जगह महिलाएं तरह-तरह के डिजाइन की मेहंदी लगवाती हुई नजर आईं। लोअर बाजार में खरीदारी करने के लिए भी लोगों की खासी भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने सोलह शृंगार का सामान, सूट, साड़ियों सहित पूजा सामग्री की खरीदारी की। मनियारी की दुकानों के अलावा कपड़ों की दुकानों में भी महिलाओं की खासी भीड़ रही।