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Shimla News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद आएंगे शिमला, राम मंदिर में गो ध्वज की होगी स्थापना

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अयोध्या राम जन्मभूमि को प्रमाणित करने के लिए शंकराचार्य ने शास्त्रों और वेदों से दिए थे 33 साक्ष्य
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गो माता को पशु की श्रेणी से हटाकर राष्ट्र माता का दिया जाए दर्जा : बाबा जगदीशानंद
अयोध्या से 22 सितंबर से शुरू की यात्रा, 33 राज्यों की राजधानी में स्थापित किया जा रहा गो ध्वज
वृंदावन में 27 अक्तूबर को होगा समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। उत्तर दिशा के ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 वीरवार को पहली बार राजधानी शिमला आएंगे। गो हत्या को रोकने और गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए राजधानी के राम मंदिर में गो ध्वज की स्थापना होगी। इस यात्रा के माध्यम से देश में गो माता के लिए श्रद्धा और सनातन धर्म की जागरुकता का संदेश फैलाया जा रहा है।
अयोध्या राम मंदिर में भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने शास्त्र और वेदों के माध्यम से अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने वाली भूमि को राम जन्म की भूमि होने का प्रमाण दिया था। इससे अयोध्या में श्रीराम मंदिर बन पाया। शंकराचार्य के आने से पहले उनके शिष्य बाबा जगदीशानंद शिमला पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर वाली जगह को प्रमाणित करने के लिए शंकराचार्य ने 39 दिन पांच जजों के साथ शास्त्रार्थ किया था। इसमें उन्होंने शास्त्रों और वेदों के माध्यम से 33 ऐसे साक्ष्य पेश किए थे जिससे यह प्रमाणित हुआ था कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का जन्म इसी भूमि पर हुआ था। इससे बाद ही यहां श्रीराम मंदिर बनाने की मंजूरी मिली थी। उन्होंने बताया कि अब गो माता को पशु की श्रेणी से हटाकर राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया है। 22 सितंबर को अयोध्या में श्री राम मंदिर में गो ध्वज स्थापना और जयघोष के साथ यह यात्रा शुरू हुई है। इसमें 33 राज्यों की राजधानी में गो ध्वज फहराया जा रहा है। 25 हजार 600 किलोमीटर की यात्रा 27 अक्तूबर को वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में गो ध्वज फहराने के साथ समाप्त होगी। राजधानी शिमला 33वां राज्य है जहां गो ध्वज फहराया जाएगा। धर्म, संस्कृति और गो माता के सम्मान के महायज्ञ में वीरवार को सनातन धर्म के ध्वज को राम मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा।
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शंकराचार्य जाखू मंदिर के करेंगे एकांत दर्शन
राजधानी में गो ध्वज फहराने से पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द हनुमान मंदिर जाखू में एकांत दर्शन करेंगे। वीरवार को सुबह 10:30 बजे शंकराचार्य जाखू मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचेंगे। दोपहर 12:00 बजे रामबाजार स्थित राममंदिर में ध्वज स्थापना करेंगे। इसके बाद भक्तों को धर्म, संस्कृति पर जागरूक करेंगे। दोपहर 3:00 बजे शंकराचार्य शिमला से देहरादून, उत्तराखंड के लिए प्रस्थान करेंगे।
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जगद्गुरु शंकराचार्य का राज्य में प्रथम आगमन : भारद्वाज
यह यात्रा एक आध्यात्मिक जागरण का आह्वान है, जो गो माता के सम्मान और सनातन धर्म के पुनर्जागरण के लिए समर्पित है। हिमाचल प्रदेश के धर्मप्रेमी नागरिकों के लिए यह अवसर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जगद्गुरु शंकराचार्य का राज्य में प्रथम आगमन है। यह उनके जीवनकाल में एक दुर्लभ और अनमोल अवसर है, जिससे लोग जगद्गुरु के पावन आशीर्वाद और प्रेरणा से लाभान्वित हो सकेंगे।
- अक्षय भारद्वाज, अध्यक्ष श्री शंकराचार्य स्वागत समिति, हिमाचल प्रदेश
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