हिमालय के पहाड़ों की गोद में उगने वाले करू (पिर्कोराइजाकरुआ) के पौधे की जड़ी-बूटी से कैंसर और लिवर की जटिल बीमारियों को ठीक करने का दावा किया गया है। करू को पहाड़ी में कुटकी भी कहते हैं। इसका पौधा चंबा, भरमौर, रोहतांग की पहाड़ियों में पाया जाता है। करू की जड़ों पर चल रहा शोध सीएसआईआर पालमपुर में पूरा हो चुका है।
शोध में पाया गया है कि करू पौधे की जड़ों से निर्मित पाउडर कैंसर और लिवर से संबंधित पीलिया, डायरिया, हैपेटाइटिस और मधुमेह आदि बीमारियों को ठीक करता है। पीलिया या हैपेटाइटिस होने पर 10 ग्राम पाउडर के सेवन से कम समय में बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है।
सीएसआईआर ने पाउडर बनाने के बाद कुटकीन नाम से एक कैप्सूल बनाया है। कैप्सूल को मार्केट में उतारने को आयुर्वेदिक कंपनियों से संपर्क किया जा रहा है। आने वाले समय में कुटकीन कैप्सूल बाजार में उपलब्ध होगा। चंबा, भरमौर और रोहतांग के अलावा यह पौधा उत्तराखंड से लेकर हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में उगता है। अब इस पौधे की प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर हैं।