साइबर पुलिस थाना में मिल रही शिकायतों को लेकर पूछताछ के लिए दो आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट में मंडी लाया जाएगा। आरोपियों से पूछताछ के बाद ही मंडी जोन में की गई ठगी राशि के बारे में सही आंकड़ा सामने आएगा। कई मामलों में यह भी सामने आ रहा है कि शातिरों ने एमएलएम के तहत खंड से जिला स्तर पर लोगों को जिम्मेवारी दी थी। कई पीड़ितों को मुख्य आरोपियों के साथ सीधा कोई लिंक नहीं था। कई पीड़ित एमएलएम के तहत ही आगे लोगों से जुड़े हुए थे और अपने जमापूंजी का निवेश कर रहे थे, लेकिन बाद में हाथ कुछ न लगने पर ठगी का शिकार हो गए।
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी पहले से ही एमएलएम से जुड़े रहे हैं। क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी का खेल 2018-19 में शुरू हुआ। 11 महीने में डबल कमाई के चक्कर में लोगों ने इस पर भारी निवेश किया।
क्रिप्टो करेंसी वचुअल मनी है। क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने पर मिलने वाले मुनाफे पर भारत सरकार ने 30 फीसदी टैक्स लगा रखा है। क्रिप्टो करेंसी में सही माध्यम से निवेश करने से कई लोगों को मुनाफा हुआ भी है, लेकिन शातिर क्रिप्टो करेंसी के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे थे। निवेश के नाम पर धनराशि तो ले रहे थे, लेकिन वास्तव में निवेश करने के बजाए धनराशि हड़प ली जा रही थी।
उधर, साइबर क्राइम एएसपी मंडी मनमोहर सिंह ने बताया कि इस मामले से जुड़ी शिकायतें मिल रही हैं। पीड़ितों के बयान कलमबद्ध किए जा रहे हैं। मामले में नियमानुसार जांच पड़ताल चल रही है। फिलहाल इस मामले में इससे अधिक कुछ नहीं कहा जा सकता है।