जिला सिरमौर की ग्राम पंचायत अरजौली, जरवाल जुनैली, कोटी पधोग, लोजामानल, पनोग, टिक्करी-दसाकना आदि। बिलासपुर जिले की धरोट, जेजवीं, खारकरी, कोसारियां, कुलीजार, मलरावन, री, तनबौल, तरवार आदि। चंबा जिले की चलारा, चनहौटा, दुर्गेठी, गाहर, सनचुई, सपरोथ, टिक्करी, टिक्करीगढ़ आदि।
हमीरपुर जिले की अमरोह, चमनेहर, चौडू्, बदारन, बगेहड़ा, बड़सर, बसारल, भलयानी, बिझड़ी, झाल्लन, गसोता, जाहू, जलाड़ी, पंधेर, पथल्यार, मिन्हासा आदि। कांगड़ा जिले की अटाहरा, चंबी, हार, झुंब, खरानल, लदौरी, मिंजरान, मुहिन, परौर, सारी, तंबेर, टकोली, त्रेहल आदि। शिमला जिले की बावत, जुब्बली, जुरू, कंडा बनाह, कोटगढ़, कुलग, मझोली, पुजारली-तीन, टिक्कर, थरोला आदि।
वर्ष 2015 से 2018 के दौरान जिला सिरमौर के विकास खंड नयना देवी की ग्राम पंचायत टरवाड़ में बगैर उचित बिलों के 2.95 लाख का दिखाया। यह व्यय जेसीबी से खुदाई, रेत-बजरी, पत्थर तुड़ाई और दरवाजों के नाम पर किया।
इसी विकास खंड की पंचायत तनबौल में मनरेगा में 2016-17 और 2017-18 में 70.15 लाख रुपये की राशि व्यय की गई, मगर इसे रोकड़ बही में दर्ज नहीं किया, जबकि यह राशि राष्ट्रीय वेबसाइट पर भी दर्ज है। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए स्थानीय लेखा विभाग ने इस बारे में जांच की भी सिफारिश की है।
बिलासपुर की पंचायत री में भी 4.85 लाख रुपये के गबन का अंदेशा है। यहां सरिया खरीद, लिंक रोड का निर्माण आदि से संबंधित कामों के बिल और वाउचर नहीं मिले। झंडूता की पंचायत मलराओं में भी बगैर बिल और वाउचर के ही 1.44 लाख खर्च हुआ।
इसे रेत, बजरी, पत्थर, ईंट खरीद पर किया दर्शाया है। चंबा की छलाडा पंचायत में बिना औपचारिकताएं 2.72 लाख की स्टोर और स्टॉक की सामग्री खरीदी गई। सिरमौर की टिक्करी डसाकना पंचायत में भी बगैर बिल और वाउचर के लाखों का भुगतान हुआ।