हिमाचल में 7 पुलिस अधिकारी और 32 कर्मचारी संदेहास्पद गतिविधियों के कारण निशाने पर रहे हैं। इन पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार करने, यौन शौषण और कई दूसरे तरह के गंभीर मामले हैं।
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विभाग की संदेहास्पद सूची में सात पुलिस अधिकारियों और 32 इंस्पेक्टर से लेकर कांस्टेबल तक नाम दर्ज हैं। इन सात अधिकारियों में से तीन पर यौन शोषण के आरोप भी हैं, जबकि अन्य चार खरीद-फरोख्त और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
इसके अलावा संदेहास्पद की सूची में नामजद 32 पुलिस कर्मियों में से अधिकतर रिश्वत लेने आरोप हैं और इन्हें विजिलेंस ने पकड़ा हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे इन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों में अधिकतर के मामले कोर्ट में विचाराधीन है।
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कुछ मामलों में पुलिस कर्मियों विभागीय कार्रवाई की गई है। विधानसभा में इसे लेकर नालागढ़ के विधायक केएल ठाकुर द्वारा पूछा गया था। सीएम ने इसका जवाब दिया है। यह मामले वर्ष 2011 से लेकर 2016 तक की अवधि के हैं। कई मामले न्यायालय के विचाराधीन हैं।
डीजी जेल सोमेश गोयल पर बूट खरीद, एसपी एल एंड टीएस राजेश वर्मा पर बैटरी खरीद, एएसपी शमशेर सिंह और सुरेश कुमार पर यौन शोषण, एएसपी बलबीर सिंह पर केस प्रापर्टी को मालखाने में ठीक से न रखने और डीएसपी अनिल दत्त पर भी सेक्सुअल ह्रासमेंट के आरोप हैं, जबकि शिवराम चौधरी पर आईपीसी की धारा 307 के तहत कोर्ट में मामला पेंडिंग है।
कांस्टेबल प्रकाश चंद, एचएचसी जसविंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल देवेंद्र, कांस्टेबल राजकुमार, हैड कांस्टेबल सुरेश कुमार, एचएचसी अरविंद कुमार, हेड कास्टेबल राजेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल रवि गुलेरिया, हेड कांस्टेबल, कुशविंद्र, एएसआई हरजीत सिंह, एचएचसी सागर चंद, एचएचसी जगजीत, एचसी विजय कुमार, एचएचसी शेर बहादुर और हेड कांस्टेबल मनसा राम पर भी कई तरह के आरोप हैं।