भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर एचपीसीए मामले में घिरते नजर आ रहे हैं। विजिलेंस की उनके खिलाफ दूसरी चार्जशीट तैयार कर ली है। इसमें धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम के लिए सरकारी भवन को गिराने के मामले में एचपीसीए को सीधे तौर पर आरोपी बनाया गया है।
विजिलेंस ने इस मामले में सरकार से अभियोजन की मंजूरी मांगी है। हालांकि अभी तक किसी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं मिली है। विजिलेंस जांच में सामने आया है कि भवन को गिराने के लिए किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
जो भी व्यक्ति इस पूरे प्रकरण में शामिल रहे वह इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि इसमें नियम का पालन नहीं हो रहा है।
चार्जशीट में पूर्व सीएम का भी जिक्र
इस भवन को गिराने के लिए जो बैठक बुलाई गई वह सिर्फ तत्कालीन मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश पर बुलाई गई। भवन को एचपीसीए ने गिराया। उस समय अपनी सीट पर बैठे आला अधिकारियों ने नियमों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया।
चार्जशीट में उल्लेख है कि यह सारा प्रकरण तत्कालीन मुख्यमंत्री निर्देश पर हुआ। जिन आईएएस अफसरों ने यह सब किया वह अच्छी तरह से जानते थे कि एचपीसीए के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे हैं।
चार्जशीट के मुताबिक अनुराग ठाकुर जुलाई 2000 में एचपीसीए के अध्यक्ष थे।
अनुराग पर नियम तोड़ने के आरोप
विजिलेंस के अनुसार अध्यक्ष को इस बारे में जानकारी थी कि 2002 में शिक्षा विभाग ने एक कालेज लैंड को लेकर एक एनओसी युवा सेवाएं एवं खेल विभाग को दिया है। लेकिन एनओसी में शर्त लगाई गई है कि कालेज के स्टाफ क्वार्टर बनाने के लिए जगह दी जाए तभी एनओसी वैध मानी जाएगी जब जमीन ट्रांसफर होगी।
एचपीसीए की नजर में कालेज का यह टाइप 4 क्वार्टर खटक रहा था। क्योंकि तब तक क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण संभव नहीं था जब तक इसे यहां से हटा नहीं दिया जाता। इस सरकारी भवन को उस कंपनी (ठेकेदार) ने गिराया जिसे एचपीसीए ने क्रिकेट स्टेडियम बनाने का ठेका दिया गया था।
यहां भी नियम को दरकिनार किया गया। इस संदर्भ में मामले के जांच अधिकारी ने एचपीसीए को 91 सीआरपीसी के तहत नोटिस जारी कर पूछा कि क्रिकेट स्टेडियम निर्माण के लिए किस कंपनी को ठेका दिया गया? किस कंपनी (ठेकेदार) ने सरकारी भवन को गिराया। लेकिन यह एचपीसीए की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
मंजूरी मिलते ही होगी चार्जशीट दाखिल
डीआईजी विजिलेंस (प्रवक्ता) अरविंद शारदा ने कहा कि मामले की जांच पूरी कर ली गई है। सरकारी अफसरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने से पहले सरकार से अभियोजन मंजूरी लेना जरूरी है इसलिए मामला सरकार के पास भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलते ही चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी जाएगी।
उधर, भाजपा का कहना है कि सीएम वीरभद्र के इशारों पर विजिलेंस ये कार्रवाई कर रही है। भाजपा पहले भी एचपीसीए से जुड़े मामलों की जांच पर सवाल उठा चुकी है।