लाहौल के चोखंग की पहाड़ी में नीलकंठ महादेव की यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं को एक खोपड़ी मिली है। यह काफी पुरानी है। आशंका जताई जा रही है कि यह खोपड़ी 18 अक्तूबर, 2011 को 18500 फीट की ऊंचाई गेंगस्टन ग्लेशियर में क्रैश हुए मिग-29 के पायलट की हो सकती है।
18 अक्तूबर, 2011 को करीब आठ बजे चोखंग की पहाड़ी के गेंगस्टन ग्लेशियर में मिग-29 क्रैश हो गया था। इसे मिग स्कवाड्रन लीडर डीएस तोमर चला रहे थे। सर्च ऑपरेशन के कुछ दिन बाद ग्लेशियर में मांस के टुकड़े, मोबाइल फोन, रुमाल और मिग-29 के पार्ट्स मिले थे।
आज दिन तक न तो ब्लैक बॉक्स बरामद हुए और न ही पायलट का सुराग लगा था। हाल ही में तीन दिन पूर्व कुछ लोग नीलकंठ महादेव यात्रा पर जा रहे थे। इन्हें नीलकंठ महादेव मंदिर से करीब दस किलोमीटर पीछे एक खोपड़ी दिखी। इन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलते ही लाहौल-स्पीति के एसपी रमन कुमार मीणा ने पुलिस दल शुक्रवार को मौके के लिए रवाना कर दिया। एसपी ने कहा कि खोपड़ी को डीएनए टेस्ट के लिए भेजा जाएगा। गेंगस्टन ग्लेशियर में क्रैश हुए मिग-29 के पायलट की हो सकती है।
यह पायलट इंदौर के मध्यप्रदेश का था। इस दौरान रेकी भी की गई थी। परिजन भी पायलट की तलाश में काफी दिन तक क्षेत्र में भटकते रहे थे, लेकिन आज तक कोई सुराग नहीं लग पाया था।