हिमाचल के एनआईटी हमीरपुर संस्थान में रैगिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सीनियर छात्र क्लास के बाद जूनियर्स की जमकर रैगिंग ले रहे थे। जांच के बाद इसका खुलासा हुआ। छात्रों को न शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी प्रताड़ित किया जा रहा था।
जांच के बाद दोषी पाए जाने पर 28 छात्रों को एक साल के लिए हास्टल से निष्कासित कर दिया गया है। छात्रों को निकालने के निर्देश मंगलवार को जारी हुए हैं। संस्थान ने छात्रों के अभिभावकों को भी इस संबंध में अवगत करवा दिया गया है।
क्लास खत्म होने के बाद होती थी रैगिंग
रैगिंग का यह मामला दो हफ्ते पहले का बताया जा रहा है। आर्किटेक्ट संकाय द्वितीय वर्ष के छात्रों ने अपने जूनियर छात्रों की रैगिंग की थी। कनिष्ठ छात्रों ने आरोप लगाया था कि उन्हें कक्षा खत्म होने के बाद द्वितीय वर्ष के छात्रों ने हास्टल में बुलाया।
यहां मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसके बाद रैगिंग के शिकार एक छात्र ने इस बारे में अपने अभिभावकों को बताया। अभिभावकों ने हास्टल वार्डन से पहले एसएमएस और फिर लिखित शिकायत की।
शिकायत मिलने के बाद संस्थान ने इस मामले पर जांच बैठाई।
नाम नहीं बताए तो सस्पेंड किए 28 छात्र
जांच के दौरान छात्रों के बयान लिए गए। इसके बाद 28 छात्रों को दोषी करार देते हुए उन्हें संस्थान के हास्टल से निष्कासित कर दिया गया है। डीन स्टूडेंट वेलफेयर, डा. सुशील चौहान ने कार्रवाई की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि जांच में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत रैगिंग पाई गई है। नियमों के तहत कार्रवाई की हैञ एनआईटी के डायरेक्टर प्रो. रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल बाहर हूं, आने पर जानकारी दी जाएगी।
क्यों हुई इतने छात्रों पर कार्रवाई?
संस्थान का तर्क है कि जांच के दौरान जब रैगिंग के शिकार आर्किटेक्ट संकाय प्रथम वर्ष के छात्रों से नाम जानने चाहे तो उन्होंने किसी एक दो छात्रों के नाम नहीं बताए। ऐसे में शक के दायरे में आए 28 छात्रों को एक साल के लिए हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया।