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'रघ़ुनाथ' की तलाश में छापेमारी, नहीं मिली कामयाबी

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ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर से चोरी हुई मूर्तियों की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। कुल्लू समेत सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस ने मूर्तियों की तलाश के लिए स्पेशल टीमें भी गठित की है। मगर अभी तक पुलिस को तलाश में कोई खास सफलता नहीं मिली है।
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मामले की जांच भी शुरू हो चुकी है। इसमें मंदिर प्रबंधन की लापरवाही भी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि यहां पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। मंदिर में एक ही सीसीटीवी कैमरा लगा था जो काफी समय से खराब पड़ा था। भगवान श्रीराम ने त्रेता युग में अश्वमेध यज्ञ के लिए खुद अपने हाथों से जिस रघुनाथ जी की मूर्ति को बनाया था, वह एकाएक चोरी हो गई।

भगवान रघुनाथ का इतिहास 1660 में यहां के तत्कालीन राजा जगत सिंह से जुड़ा हुआ है। यहां पूर्व में रहे जिला भाषा अधिकारी कुल्लू डा. सीताराम ठाकुर का कहना है कि 1660 ई. में यहां रघुनाथ की मूर्ति लाई गई। इसके बाद राजा को शाप से मुक्ति मिली थी और दशहरा उत्सव शुरू हुआ था।
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हिमाचल के अधिष्ठाता देव रघुनाथ जी की मूर्ति चोरी होने से पूरी कुल्लू घाटी गमगीन है। रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार एवं कुल्लू सदर से विधायक महेश्वर सिंह धर्मशाला में बीच में ही विधानसभा सत्र छोड़कर मंगलवार दोपहर बाद घर पहुंचे। पालकी में भगवान रघुनाथ्ा की मूर्ति न देखकर वे फूट-फूट कर रो पड़े।

354 वर्ष पूर्व अयोध्या से लाई थी मूर्ति

जनश्रुति है कि कुल्लू के राजा जगत सिंह ने 1660 में बह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए अयोध्या से भगवान रघुनाथ (श्रीराम) की मूर्ति लाकर यहां स्थापित की थी। मान्यता है कि भगवान राम ने त्रेता युग में अश्वमेध यज्ञ के लिए खुद अपने हाथों से इस मूर्ति की रचना की थी।

मूर्ति की स्थापना के बाद से कुल्लू का दशहरा मेला शुरू हुआ जो आज भी जारी है। कुल्लू के सभी देवी-देवताओं ने रघुनाथजी की अधीनता स्वीकार की थी। उन्हें 18 करोड़ देवताओं का मुखिया माना जाता है। कहते हैं मूर्ति के साथ अयोध्या से एक बैरागी बाबा साथ आए थे।

वे कुल्लू में ही बस गए। बाबा का वंश 200 साल पहले खत्म हो गया। उसके बाद से कुल्लू का राज परिवार ही इस मूर्ति और मंदिर की देखभाल कर रहा है। अभी कुल्लू राज परिवार के मुखिया महेश्वर सिंह रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार हैं।

ऐसे अंजाम दी चोरी

सुल्तानपुर स्थित ऐतिहासिक मंदिर से चोर रघुनाथ के अलावा नरसिंह, गणपति और शालिग्राम की मूर्तियां, चरण पादुका, पंचमणी, चांदी का शंख-प्लेट, चांदी की पीढ़ी, चांदी के दो लोटे, दो कटोरे और एक धूप स्टैंड भी ले उड़े। कुल एक किलो सोने और दस किलो चांदी की मूर्तियां और सामान गायब हुआ है।

सोमवार रात को शातिर मंदिर की छत उखाड़कर रस्सी के सहारे नीचे उतरे और चोरी को अंजाम दिया। सोने और अष्टधातु की इन मूर्तियों की कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। चोरी के समय चौकीदार मंदिर के साथ लगते कमरे में सोए रहे। मूर्ति चोरी का पता सुबह चला।

क्षेत्र के अधिष्ठाता देव की मूर्ति चोरी होने की खबर फैलते ही सैकड़ों की तादाद में लोग मौके पर पहुंच गए। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। महिलाएं रोने-बिलखने लगीं। मूर्तियों की सलामती के लिए लोगों ने मंदिर परिसर में ही दिनभर रामचरित मानस का पाठ किया।

शोक में कुल्लू का मुख्य बाजार दिन भर बंद रहा। उधर, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। धरपकड़ के लिए पूरे क्षेत्र की नाकाबंदी कर दी गई है। जबकि जिलों की पुलिस को अलर्ट कर दिया है। फोरेंसिक टीम जांच में जुट गई है। इससे पहले जनवरी 2014 में इसी मंदिर में चोरी हो चुकी है।

कुल्‍लू दशहरे पर भी संकट

इस चोरी के बाद ऐतिहासिक कुल्‍लू दशहरे पर भी संकट मंडराने लगा है। मंदिर के पुजारी (भाटू) हेम राज ने बताया कि उनका भतीजा सुबह पूजा की तैयारी के लिए करीब 7:15 बजे मंदिर में पहुंचा। दो दरवाजे खोलकर जब वह मुख्य मंदिर में पहुंचा तो वहां से भगवान रघुनाथ सहित अन्य मूर्तियां गायब थीं। चोर छत को फाड़ कर रस्सी के सहारे मंदिर में घुसे थे।

अयोध्या के पुजारी दुखी
वहीं, रघुनाथ मंदिर से चोरी गईं मूर्तियां अयोध्या के स्वर्गद्वार स्थित त्रेतानाथ मंदिर से गई थीं। मंदिर के पुजारी व व्यवस्थापक सुधीर मिश्रा को ‘अमर उजाला’ ने घटना की जानकारी दी, तो दु:खी हो गए। बोले-ठाकुर की मूर्ति से राजा के पापों का उद्धार हुआ था।

माता सीता की मूर्ति सुरक्षित

शातिर चोर अष्टधातु से बनी रघुनाथजी सहित हनुमान, नरसिंह, गणपति और सालिगराम की मूर्तियां तो ले गए मगर मां सीता की मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। मां सीता की मूर्ति श्यनकक्ष में ही कपड़े से लपेटकर रखी थी। इसे चोर हड़बड़ाट या जल्दबाजी में देख नहीं पाए।

मां सीता की मूर्ति का छोटे आकार का होना भी इसकी एक वजह रही। रघुनाथजी की मूर्ति अष्टधातु से बनी है। यह तीन ईंच लंबी है जबकि मां सीता की मूर्ति इससे भी छोटी है। सदियों से हर रोज रघुनाथजी सहित मां सीता और अन्य देवताओं की पूजा अर्चना के बाद मूर्तियों को श्यनकक्ष में कपड़े से लपेटकर रखा जाता है।

चोरी की इस बड़ी वारदात को सुलझाने के लिए स्पेशल पुलिस टीम बनाई गई है। इसकी कमान एएसपी कुल्लू निहाल चंद को दी गई है। इसके सदस्य एसडीपीओ आनी सुरेश चौहान, एसएचओ कुल्लू इंस्पेक्टर नील चंद, सब इंस्पेक्टर जितेंद्र, सब इंस्पेक्टर अंकुर और शिमला सीआईडी मुख्यालय से सेलफोन हेड कांस्टेबल राजीव को बनाया गया है।
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निशाने पर हिमाचल के मंदिर

हिमाचल के मंदिर क्या बड़े गिरोहों के निशाने पर हैं? ऐसा इसलिए कह सकते हैं कि हिमाचल के मंदिरों में चोरियों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। दो साल में करीब 115 चोरियां हो चुकी हैं। इनमें से लगभग 80 मामलों में सुराग ही नहीं लग सका है।

दो दशकों में तो हिमाचल के मंदिरों में छोटी-बड़ी हजारों चोरियां हो चुकी हैं। इनमें से अधिकतर में न तो चोरी का सामान मिला, न ही चोर पकड़े गए। मंदिरों में चोरियों के सिलसिले पर कुल्लू में रघुनाथ मंदिर से संबद्ध विधायक महेश्वर सिंह ने ही अगस्त 2014 में विधानसभा के मानसून सत्र में सवाल पूछा, तो उस समय मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जवाब दिया था कि एक जनवरी 2013 से 15 जुलाई 2014 के बीच मंदिरों में चोरी के 102 मामले दर्ज किए गए हैं।

इनमें से 63 मामलों में अनट्रेस रिपोर्ट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि इस अवधि में केवल 21 केस ही सुलझाए जा सके। 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 18 मामलों के चालान कोर्ट में डाल दिए गए हैं। राज्य पुलिस विभाग के सूत्रों ने बताया कि एक जनवरी 2013 से लेकर अब तक मंदिरों में चोरी के मामलों की संख्या बढ़कर 115 हो चुकी है। इनमें से करीब 80 मामले अभी तक अनसुलझे हैं।
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