स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को एचपीसीए मामले में एक और झटका लगा है। केंद्र सरकार ने एचपीसीए केस में आरोपी बनाए गए आईएएस अधिकारियों दीपक सानन और केके पंत पर केस चलाने की मंजूरी नहीं दी है।
केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को ऑब्जेक्शन लगाकर फाइल लौटा दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अफसरों का पक्ष सुनने के बाद ही फाइल भेजी जाए। फाइल की एक कॉपी आरोपी अफसरों को भी दी जाए।
स्टेट विजिलेंस ने हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) केस में तत्कालीन राजस्व सचिव और वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएएस दीपक सानन तथा कांगड़ा के उस समय के डीसी केके पंत को आरोपी बनाया है।
आठ महीने पहले भेजी थी फाइल
इन दोनों आईएएस अफसरों पर केस चलाने की मंजूरी लेने के लिए राज्य सरकार ने आठ माह पहले कार्मिक मंत्रालय को फाइल भेजी थी। सरकार की ओर से भेजी गई फाइल में अफसरों का पक्ष नहीं था।
विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने फाइल बनाकर केंद्र को भेजी थी। सूत्रों कहना है कि केके पंत के मामले में जो साक्ष्य भेजे गए, वे कमजोर थे।
कार्मिक मंत्रालय ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी देने से पहले राज्य सरकार को आरोपियों के पूरे पक्ष के साथ विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए कहा है। प्रदेश सरकार के एक आला अधिकरी ने इसकी पुष्टि की है।
ये है पूरा मामला
तत्कालीन राजस्व सचिव दीपक सानन पर एचपीसीए को नियमों के विपरीत लीज पर जमीन देने का आरोपी बनाया है। केके पंत पर उपायुक्त कांगड़ा के तौर पर क्रिकेट स्टेडियम के लिए शिक्षा विभाग के भवन को गिराने की अनुमति देने का आरोप है। इन दोनों मामलों में विजिलेंस की ओर से मुकदमे दर्ज किए थे।
इन मामलों की जांच स्टेट विजिलेंस कर रही है। विजिलेंस एचपीसीए से जुड़े करीब तीन मामलों में जांच कर रही है जिनमें पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटों को भी आरोपी बनाया गया है।