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हत्या के जुर्म में हाईकोर्ट ने दी उम्र कैद की सजा

Mon, 30 May 2016 10:14 AM IST
हत्या के जुर्म में हाईकोर्ट ने दी उम्र कैद की सजा
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हाईकोर्ट ने सत्र न्यायाधीश के फैसले को पलटते हुए दोषी को यह सजा सुनाई।
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प्रदेश हाईकोर्ट ने दोषी सरवन सिंह को हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनवाई है। कोर्ट ने सत्र न्यायाधीश हमीरपुर के फैसले को पलटते हुए दोषी को यह सजा सुनाई। न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने शिकायतकर्ता और प्रदेश सरकार
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की अपील पर दोषी की अपील को नामंजूर किया। शिकायतकर्ता व प्रदेश सरकार ने दोषी की सजा को कोर्ट ने धारा 325 (आईपीसी) से धारा 302 में तबदील कर सजा बढ़ाने की गुहार लगाई थी जबकि दोषी ने सत्र न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ अपील दायर की थी।

मामले के अनुसार 3 अप्रैल, 2013 को दोषी सरवन सिंह का पोता व मृतक का बच्चा व अन्य बच्चों के साथ कंम्यूनिटी सेंटर के ग्राउंड में खेल रहे थे और खेलते हुए दोषी के पोते को कुछ चोटें आई। अगले दिन दोषी ने मृतक के घर जाकर उसके सिर पर बांस के डंडे से बार किया, जिस कारण उसकी मृत्यु हो गई थी।
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सत्र न्यायाधीश के समक्ष अभियोजन पक्ष ने 16 गवाहों को पेश किया था। सत्र न्यायाधीश ने दोषी को धारा 325 (आईपीसी) के तहत 1 साल व 17 दिन की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने मामले के सभी पहलुओं के अवलोकन के बाद दोषी को हत्या के जुर्म में दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनवाई।

दो साल कैद, 50 हजार जुर्माने की सजा- हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास के दोषी देवेंद्र कुमार और गौरव को दो साल की कैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक) ऊना के फैसले को संशोधित करते हुए यह आदेश दिए। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपील को मंजूर करते हुए दोषियों को सजा सुनाई।

सूचना न देने पर 20 हजार का जुर्माना

कोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना न देने पर सतलुज जल विद्युत निगम व धौलासिद्घ हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट हमीरपुर में तैनात जन सूचना अधिकारियों पर बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने याचिकाकर्ता शेखर एस श्रीवास्तव की याचिका को मंजूर करते हुए सतलुज जल विद्युत निगम को मांगी सूचना चार हफ्ते के भीतर देने को कहा।

कोर्ट ने सूचना अधिकारियों के रवैये पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सत्य हमेशा सत्य रहता है और यह महत्वपूर्ण नहीं है कि इस सत्य तक पहुंच किसकी है। दरअसल, धौलासिद्घ हाइड्रो प्रोजेक्ट के सूचना अधिकारी ने यह कहते हुए आईटीआई आवेदन निरस्त

कर दिया था कि मांगी गई सूचना उनके पास उपलब्ध नहीं है जबकि आरटीआई कानून के तहत आवेदन वापिस नहीं कर सकता। कोर्ट ने सूचना के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए जुर्माना राशि जन सूचना अधिकारियों से निजी तौर पर वसूलने के निर्देश दिए।

 
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अंबाला से कौरिक तक सड़क दुरुस्त करने के आदेश

हिमाचल हाईकोर्ट
प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह अंबाला से कौरिक राष्ट्रीय राजमार्ग 5 को सुरक्षित यातायात के काबिल बनाए और इस बाबत हर महीने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने शिमला और किन्नौर जिला में जानलेवा बने राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ खतरनाक स्थानों पर सुरंगें बनाने के आदेशों की मांग करने वाली याचिका में यह आदेश दिए।

याचिकाकर्ता निर्मल चंद्र नेगी ने अपनी याचिका के माध्यम से कोर्ट को बताया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर किन्नौर में पहाड़ों की तरफ  से कुछ स्थानों पर लगातार पत्थर गिरते रहते हैं, जिससे उन स्थानों पर हमेशा जान का खतरा बना रहता है। प्रार्थी का आरोप है कि क्षेत्र में चल रही विद्युत परियोजनाओं के कारण पहाड़ छननी हो गए हैं।

कोई भी प्रोजेक्ट वैज्ञानिक तरीके से खनन नहीं कर रहा। प्रार्थी का कहना है कि अवैध खनन से उरनी ढांक, लाल ढांक, राली और थोपन में इस राजमार्ग को काफी क्षति पहुंची है। निगुलसरी में 200 मीटर सड़क भूक्षरण के कारण बर्बाद हो गयी। प्रार्थी ने मांग की थी कि सभी खतरनाक स्थानों पर सुरंगें अथवा सुरक्षित बाईपास सड़क बनाए जाने के आदेश केंद्र व राज्य सरकार को दिए जाएं।
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