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पति की हत्या में आरोपी पत्नी और उसका मित्र बरी

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अपने पति की हत्या की आरोपी वैशाली और उसके मित्र अमित कुमार को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश पीएस राणा की खंडपीठ ने सत्र न्यायाधीश सोलन के फैसले को पलटते हुए दोनों आरोपिओं को दोषमुक्त करते हुए उक्त फैसला सुनवाया। मामला हिमाचल के सोलन जिले का है।
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निचली अदालत ने 28 नवंबर 2011 को दोनों आरोपिओं को कठोर आजीवन कारावास और 25-25 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। प्रार्थियों ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपील को स्वीकारते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 6 अगस्त, 2010 को सिकंदर घाट के समीप जसबीर मृत पाया गया।

वैशाली और अमित में हो गई थी दोस्ती

इसके पास से पुलिस को अमित कुमार का पहचान पत्र, चाकू, चप्पल और डंडा मिला। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत पुलिस स्टेशन धर्मपुर में केस दर्ज किया। 11 अगस्त, 2010 को अभियुक्त अमित कुमार ने पुलिस को आत्मसमर्पण किया। आरोपी वैशाली और नरेश कुमार को पुलिस ने शुरूआती जांच के दौरान 13, 14 अगस्त 2011 को हिरासत में लिया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार मृतक राजबीर और उसकी पत्नी वैशाली बद्दी में किराए के मकान में रहते थे।

अमित कुमार और नरेश कुमार का उनके घर आना-जाना था। वैशाली और अमित कुमार के बीच आपसी तालमेल बढ़ गया। तीनों ने जसबीर को मारने की साजिश रची थी। वारदात के दिन अमित कुमार और नरेश कुमार जसबीर के घर आए। तीनों ने मिलकर शराब पी और सोलन-कुमारहट्टी घूमने निकल गए।
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अभियोग साबित करने के लिए 40 गवाह पेश किए

सिकंदर घाट के समीप दोनों आरोपिओं ने मिलकर जसबीर को मारकर फेंक दिया। अमित कुमार गाड़ी लेकर अपने गांव मुजफरनगर चला गया। उसने साक्ष्यों को नष्ट भी किया। पुलिस ने जांच के दौरान वैशाली के पर्स से अमित कुमार का एटीएम कार्ड और वैशाली की ओर से अमित को लिखे हुए पत्र बरामद किए। तीनों आरोपिओं की फोन कॉल डिटेल जांची गई। पाया गया कि वारदात के दिन तीनों ने आपस में काफी बातचीत की। जांच पूरी होने पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ निचली अदालत में चलान पेश किया। अभियोजन पक्ष ने तीनों पर अभियोग साबित करने के लिए करीब 40 गवाह पेश किए।

निचली अदालत ने नरेश कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अमित कुमार और वैशाली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को दोनों ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों और तथ्यों का अवलोकन करने के पश्चात पाया कि अभियोजन पक्ष अमित कुमार और वैशाली पर अभियोग साबित करने में सफल नहीं रहा है।
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