प्रदेश के विभिन्न जिलों के सैकड़ों लोग जालंधर की एक फर्जी कंपनी के झांसे में आकर ठगी का शिकार हुए हैं। लोगों ने इस कंपनी में करोड़ों का निवेश कर खून-पसीने की कमाई गंवाई है। जालंधर की निजी कंपनी के अधिकारियों ने मंडी समेत अन्य जिलों में सेमिनार का आयोजन कर लोगों को विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ देने का झांसा देकर पहले लाखों रुपये का निवेश करवाया।
अब कंपनी के अधिकारियों का कोई अता-पता नहीं चल पा रहा है। ठगी के शिकार हुए लोगों ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें झांसा दिया कि कंपनी निवेशकों की पूंजी हाइडल प्रोजेक्ट, रीयल एस्टेट, ट्रेडिंग हेल्थ केम प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर निवेश करती है।
इन लोगों ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों के अनुसार सभी प्रोजेक्टों से अर्जित मुनाफे को निवेशकों की ओर से ली गई योजनाओं के आधार पर उन्हें दिया जाता था। फर्जी कंपनी की ठगी के शिकार हुए निवेशक सरन ठाकुर, वीरेंद्र खागटा, ओम प्रकाश शर्मा, हेमराज ठाकुर, जौनेंद्र कुमार, योगराज गुलेरिया, सुनील कुमार, घींदर सिंह चौहान,
लाल सिंह, विजय कुमार, विरेंद्र कुमार, विनीत कुमार, अमित रोहाल, रीता प्रीमटा, नीरज वालिया, अभिमन्यु, अमिता, धर्मेंद्र शर्मा, संतोश कुमार, रत्न चंद ठाकुर, ख्याली राम, कंवर सिंह और निशा ठाकुर ने बताया कि उन्हें कंपनी के अधिकारियों ने झांसे में लिया और उनको लाखों की चपत लगा दी। लोगों ने बताया कि अब कंपनी के अधिकारियों के
फोन बंद आ रहे हैं और इनके जालंधर कार्यालय में जाकर उन्हें धमकाया जा रहा है। ठगी के शिकार लोगों में हमीरपुर, मंडी, शिमला, सोलन समेत अनेक जिलों से जुड़े हैं। मंडी जिला के सरन ठाकुर ने बताया कि इस मामले की
शिकायत ठगी के शिकार दर्जनों लोगों ने डीजीपी शिमला से भी की है तथा आरोपियों लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई है। उन्होंने बताया कि हिमाचल के सैकड़ों लोगों के करोड़ों रुपये इस कंपनी ने डकार दिए हैं।
वहीं, डीजीपी संजय कुमार ने कहा कि वे मामला देखने के बाद ही कुछ बता सकते हैं। हो सकता है कि कोई शिकायत आई हो।