वीरभद्र सिंह सीडी मामले में तत्कालीन जांच अफसरों पर गाज गिर गई है। विजिलेंस ने मंगलवार को इस केस में विजिलेंस के पूर्व एसपी हृदयेश बिष्ट और आईओ दयासागर पर एफआईआर दर्ज कर दी है।
एफआईआर आईपीसी की धारा 218 के तहत शिमला थाने में दर्ज हुई है। इसमें इन अफसरों पर आरोप है कि वीरभद्र सिंह पर जबरन केस बनाने के लिए इन्होंने गवाहों के झूठे बयान दर्ज किए।
दोनों को ही 10 दिन पहले कारण बताओ नोटिस भी जारी हुए थे। बिष्ट वर्तमान में किन्नौर में होमगार्ड के कमांडेंट हैं। इस केस में पूर्व डीजीपी डा. डीएस मन्हास को भी आरोपी बनाया गया है, लेकिन चूंकि वह रिटायर हो चुके हैं इसलिए कार्रवाई के लिए भारत सरकार से मंजूरी मांगी गई है।
सीडी केस में वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह को लोअर कोर्ट ने 24 दिसंबर, 2012 को बरी घोषित कर दिया था। हालांकि, एसएम कटवाल की याचिका पर इस बारे में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
राज्य में सरकार बदलने के बाद विजिलेंस ने सीडी मामले में जांच अफसर रहे अधिकारियों के खिलाफ जांच खोली थी। इनमें आरोप था कि पूर्व भाजपा सरकार के समय कुछ अफसरों ने गवाहों के झूठे बयान दर्ज कर ये केस बनाया।
इसी आधार पर अब केस दर्ज हुआ है। बिष्ट 2009-10 में विजिलेंस में एसपी थे। मंगलवार को एफआईआर दर्ज होने के बाद संपर्क करने पर हृदयेश बिष्ट ने कुछ भी कमेंट करने से इनकार किया।