हिमाचल में आबकारी व कराधान विभाग के अधिकारियों ने अपनी परफॉरमेंस दिखाने के लिए बद्दी की एक कंपनी पर 24 करोड़ का टैक्स और जुर्माना लगा दिया। दो वर्ष पूर्व लगाए इस टैक्स और जुर्माने को विभाग की ही अपीलेट अथॉरिटी ने अब गलत करार दिया है। कंपनी पर लगाए गए टैक्स को भी खारिज कर दिया गया है।
बद्दी में कंप्यूटर का एंटी वायरस साफ्टवेयर बनाने वाली नामी कंपनी क्विक हील पर दो साल पहले वैट चोरी का आरोप लगाते हुए 26 करोड़ का टैक्स और जुर्माना लगाया गया। टैक्स के निर्धारण को चुनौती देते हुए कंपनी के संचालकों ने इसे खारिज करने की शिमला मुख्यालय में अपीलेट अथॉरिटी के पास अपील की।
सभी तथ्यों को देखकर अपीलेट अथॉरिटी ने कंपनी की अपील को जायज ठहराते हुए कंपनी के खिलाफ की कार्रवाई को रद्द कर दिया। उधर आबकारी एवं कराधान विभाग की अपीलेट अथॉरिटी एवं अतिरिक्त आयुक्त डीसी नेगी ने कहा कि कंपनी की अपील मंजूर कर ली गई है।
हाईकोर्ट ने दिए थे निपटारे के निर्देश
वर्ष 2012 में विभाग ने कंपनी पर कार्रवाई के आदेश जारी किए। एक साल तक मामला विभाग की अपीलेट अथॉरिटी के पास रहा। सुनवाई न होता देख कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए अपीलेट अथॉरिटी के पास मामला वापस भेजा कि चार सप्ताह के भीतर इस केस का निपटारा किया जाए।
आबकारी एवं कराधान विभाग के एईटीसी ने इस कंपनी पर वैट चोरी का मामला यह कहते हुए बनाया कि उसने एंटी वायरस सीडी का मूल्य कम आंका है। अधिक मूल्य निर्धारित कर उसकी कुल बिक्री में इजाफा किया गया, जिस पर 24 करोड़ का अतिरिक्त टैक्स और लगाया गया।
अपीलेट अथॉरिटी ने कर निर्धारण प्राधिकारी की दलील को रद्द करते हुए 24 करोड़ की डिमांड खारिज की। अथॉरिटी ने माना कि जिस मूल्य पर कंपनी की सीडी बनवाई है, वह मूल्य वाजिब है। साथ ही कंपनी ने ब्रांच ट्रांसफर की है, लिहाजा उस पर कोई कर देय नहीं बनता।