वन भूमि पर अतिक्रमण कर सेब बगीचे उगाने वालों में अपर शिमला की कोटखाई वन रेंज के ग्रामीणों ने जंगल के जंगल कब्जा लिए हैं। भरोला बीट इसमें सबसे आगे है। यहां 295 कब्जे हुए हैं। कोटखाई बीट में 180 कब्जे सामने आए हैं। कब्जा करने वालों में ग्रामीण ही नहीं, नेता और राजस्व के पूर्व अधिकारी, पुलिस कर्मचारी और अन्य रसूखदार हस्तियां भी शामिल हैं।
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नाघी बीट के निवासी भी अतिक्रमण में पीछे नहीं हैं। यहां 147 लोगों ने वन भूमि दबाई हुई है। कलवोग बीट में 106, गरावग में 102, हिमरी में 101, कलाला में 70, खनेटी में 69, महासू में 50, गाजटा में 39, बघाल में 27, सिहानी में 25 और रतनाड़ी में 23, रयोघाटी में 17, शीले 24 और घरौंक वन बीट में 17 कब्जे हुए हैं।
कोटखाई रेंज की छह वन बीट ऐसी हैं, जिसमें 100 से अधिक कब्जे हैं। एक-एक कब्जे में एक से 100 बीघा तक जमीन कब्जाई हुई है। हाईकोर्ट में दी गई लिस्ट के तहत ही वन विभाग कब्जे छुड़ाने के लिए सेब बगीचे काटने की कार्रवाई कर रहा है।
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80 ने कब्जाई 10 बीघा से ज्यादा जमीनें
वन भूमि पर कब्जा कर सेब बगीचे उगाने वालों में कोटखाई क्षेत्र के 1362 में 80 ऐसे बागवान हैं, जिन्होंने 10 बीघा से ज्यादा वन भूमि पर सेब उगाए हैं। राजस्व विभाग की ओर से वन विभाग को दी गई कब्जों की सूची से इसका खुलासा हुआ है। वन भूमि पर लगाए गए सेब बगीचों में 15 साल पुराने सेब के पेड़ भी हैं।
कई पेड़ ऐसे हैं, जिनमें अब फल नहीं होते। ऐसे स्थानों पर बागवानों ने नए पेड़ उगा दिए हैं। सबसे ज्यादा कब्जे कोटखाई, रोहड़ू, जुब्बल, चौपाल में हुए हैं। मंडी और कुल्लू में भी इनकी अच्छी खासी संख्या है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक बिस्वा में कब्जा करने वाले बागवानों की संख्या हजारों में है लेकिन रसूखदारों ने बीघा के हिसाब से वन भूमि पर कब्जा किया है। एक बीघा व इससे ज्यादा कब्जा करने वाले बागवानों की संख्या 500 से अधिक है, जिन्होंने बगीचों में विदेशी किस्म के सेब की पैदावार की है।
वन भूमि पर कब्जा करके उगाए जा रहे सेब पेड़ों को उच्च न्यायालय के आदेशानुसार काटा जा रहा है। वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की मुहिम जारी है। वन विभाग का मानना है कि निशानदेही पूरी करने के बाद ही विभाग अतिक्रमण को हटा रहा है। कई बागवानों से कब्जे छुड़ा लिए गए हैं जबकि कइयों के अवैध कब्जे पर उगाए गए सेब के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। रसूखदार अभी कार्रवाई से बचे हुए हैं।
10 बीघा से ज्यादा कब्जे- रोशन लाल 11 बीघा, सुरेंद्र सिंह 11 बीघा, प्रताप सिंह 11 बीघा, रविंद्र सिंह 12 बीघा, विकास 13 बीघा, रमेश 11 बीघा, 3 बिस्वा, रंजीत सिंह 10 बीघा 3 बिस्वा, संजीव 10 बीघा, 7 बिस्वा, मोहन लाल 10 बीघा, कृष्ण लाल- 15 बीघा, एक बिस्वा, गंगा राम 11 बीघा, 18 बिस्वा, लाल सिंह 10 बीघा, 5 बिस्वा।