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अवैध फोन टैपिंग के नहीं मिले सबूत

Sat, 24 May 2014 01:34 PM IST
उषा नेगी/अमर उजाला, शिमला
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बहुचर्चित फोन टैपिंग मामले में विजिलेंस को कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। सवा साल चली जांच में विजिलेंस के हाथ कुछ राजनेताओं की बातचीत की रिकॉर्डिंग हाथ आई है, लेकिन यह रिकॉर्डिंग वैध थी या अवैध, यह साबित करने के सबूत नहीं मिले हैं।
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ऐसे में विजिलेंस ने ड्राफ्ट चार्जशीट में 6 महीने से पुरानी रिकॉर्डिंग रखने के लिए सीआईडी के पूर्व प्रमुख आईडी भंडारी को मुख्य आरोपी बनाया है। फाइल अब गृह विभाग को भेज दी गई है।

विजिलेंस ने इंडियन टेलीग्राफ एक्ट की धारा 26 के तहत आरोपी बनाते हुए भंडारी के खिलाफ आपराधिक मामला बनाने की सिफारिश की है। विजिलेंस का दावा है कि जांच के दौरान उन्हें 2009 से 30 जून 2012 के दौरान की रिकॉर्डिंग मिली है।
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विजिलेंस ने भंडारी पर चार मुख्य आरोप लगाए हैं। जिनमें तीन अहम हैं। पहला, 6 महीने से पुरानी रिकॉर्डिंग क्यों रखी? दूसरा बिना अनुमति फोन टैप क्यों किए? तीसरा फोन टैपिंग के लिए अनुमति मांगने के लिए संबंधित व्यक्ति का पूरा नाम, पता और जानकारी क्यों नहीं ली गई?

विजिलेंस को जो चार फोन की अवैध टैपिंग मिली है, वह एक जुलाई 2012 से 26 दिसंबर 2012 तक टैप हुए कुल 247 फोन में से हैं।

इसके अलावा गृह विभाग और सीआईडी के कुछ अधिकारियों की भी प्रशासनिक खामियां सामने आई हैं, जिनके खिलाफ विजिलेंस ने जांच रिपोर्ट में विभागीय जांच की सिफारिश की है। यह एफआईआर 26 जून 2013 को दर्ज हुई थी।

कोर्ट में आरोप साबित करे विजिलेंस : भंडारी
रिटायर डीजीपी एवं पूर्व सीआईडी प्रमुख आईडी भंडारी ने कहा है कि वह दावे के साथ कह सकते हैं कि कोई फोन अवैध तरीके से टैप नहीं हुए। रही बात पुरानी रिकॉर्डिंग मिलने की तो यह नोडल आफिसर की जिम्मेदारी नहीं है।

रिकॉर्ड, इंस्पेक्टर की कस्टडी में होता है नोडल आफिसर के नहीं। विजिलेंस अपने आरोप कोर्ट में साबित करे और बताए कि किसके आर्डर से केस का रिकॉर्ड जब्त किया गया? अंदर ही कंप्यूटर क्रश करने के बाद रिकॉर्ड बाहर आने थे। लेकिन रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों किए गए?
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