भाजपाइयों का कहना है कि राजनैतिक दबाव के चलते बाबा अमरदेव को छोड़ दिया गया है।
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तेंदुए और शेर की खाल पर बैठकर बाबा तंत्र विद्या और सिद्धि करता था। यही नहीं रामलोक मंदिर की ब्रांडिंग के लिए वह प्रभावी राजनेताओं को को भी मंदिर में बुलाता रहता था। ऐसा इसलिए कि निर्माणाधीन मंदिर अधिक से अधिक प्रसिद्धि पा सके।
चर्चा तो यहां तक है कि कई राजनेता मनोकामना की पूर्ति के लिए बाबा अमरदेव से तंत्र विद्या का जाप भी करवाते थे। हालांकि इसके कोई पुख्ता सुबूत नहीं हैं, लेकिन ग्रामीण कई तरह के खुलासे कर सकते हैं। पूछताछ के दौरान अमरदेव ने खालों के मामले में चुप्पी साधे रखी है।
बस इतना कहा है कि यह खालें करीब ढाई वर्ष पहले किसी भक्त ने दी है। भक्त का नाम उसे याद नहीं। जब याद आएगा तो बता देंगे। इधर, भाजपाइयों का कहना है कि राजनैतिक दबाव के चलते बाबा अमरदेव को छोड़ दिया गया है। कई राजनेताओं का संरक्षण बाबा के ऊपर है।
खालें तो पूजा की चीज हैं : साध्वी
बाबा की अनुयायी साध्वी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि खालें तो पूजा और साधनी की वस्तु है। बाबा ने किसी का क्या बिगाड़ा है, लेकिन जिन लोगों ने यह षड्यंत्र रचा है, उन्होंने सही नहीं किया है।