हिमाचल के काजा में चीन चलो ने नारे ने कई सवाल खड़े कर दिए है। ऐसी क्या नौबत आ गई कि लोगों को चीन के सहयोग की जरूरत पड़ गई। हालांकि पुलिस ने नारे लगाने वाले दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
लेकिन अभी भी कई सवाल खड़े है। वहीं, लोग भी दबी जुवान कहीं न कहीं सरकार को दोषी मान रहे है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि हालत ऐसी है कि स्पीति के लोगों को अपने देश में रहकर भी दूसरे देश का समझा जाता है। अपने देश में ही आईकार्ड लेकर घूमना पड़ता है।
इससे बड़ी देश के लोगों के लिए क्या विडंबना हो सकती है कि देश के भीतर ही अपमान हो रहा है। शायद यहीं गुबार लोगों के मन में था और वह चीन चलो के नारे लगा बैठे। हालांकि आज तक पहले ऐसा नहीं हुआ था।
आईकार्ड रखना पड़ता है साथ
लोगों की इस बारे में मिली जुली राया है। अपर स्पीति विकास मंच के सचिव दोरजे छेरिंग कहते है कि लोग हमे अपने ही देश में इंडियन समझने को तैयार नहीं है। आज भी देश में आईकार्ड कर सफर करना पड़ता है।
वहीं, प्रदेश सरकार द्वारा जो अधिकारी स्पीति और काजा के लिए भेजे होते है,वह क्षेत्र के विकास के लिए कहीं भी गंभीर नजर नहीं आते है। हालत ऐसी है कि बजट होने के बाद भी लोग बिजली, सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से महरूम है।
कुंजम टॉप से होकर जाने वाली सड़क की भी हालत 40 सालों से दयनीय है। जिसका लोगों में भारी रोष है। वहीं ताबो पंचायत के प्रधान टाशी छेरिंग का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं की समस्या तो है। लेकिन ऐसा लोगों का बोलना नहीं चाहिए था।
क्या कहता है प्रशासन
इधर, एडीएम काजा सुलीन शर्मा का कहना है कि प्रशासन की ओर से लोगों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने भी माना की बिजली और सड़कों की दयनीय हालत से लोग परेशान है। लेकिन सड़क के सुधार के लिए इस बार 1 करोड़ 65 लाख की राशि आ गई है।
वहीं, चायना चलो के नारे लगाने के आरोपियों को मंगलवार को रिकांगपिओ कोर्ट में पेश किया गया। जहां से आरोपियों को 29 अगस्त तक के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। जहां पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।