फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस चालाकी से दबोचे बदमाश, काबिले तारीफ

Mon, 15 Dec 2014 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नादौन (हमीरपुर)
विज्ञापन
विज्ञापन
हमीरपुर जिला के स्थानीय पंजाब नेशनल बैंक एटीएम में बीएसएनएल के एक कर्मचारी का कार्ड बदलकर तीन शातिरों ने 40 हजार रुपये उड़ा लिए। जब तक ठगी के शिकार संतोष कुमार निवासी अंसरा के फोन पर पैसे निकलने का मैसेज आया तब तक तीनों शातिर गाड़ी में सवार होकर हमीरपुर की तरफ फरार हो गए।
विज्ञापन


घटना सोमवार सुबह 9.45 बजे की है। संतोष ने जैसे ही मैसेज पढ़ा उसने तुरंत 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस को माजरा समझाया और मदद मांगी।

सूचना पर नादौन पुलिस तुरंत हरकत में आई और एसएचओ नादौन जसबीर ठाकुर ने झनियारी में लक्की नाम के अपनी युवक को सूचित कर कार को रुकवाने के लिए कहा।

लक्की ने मामले की गंभीरता को देख स्थानीय लोगों को भी इकट्ठा कर लिया। जैसे ही चंडीगढ़ नंबर की बताई गाड़ी झनियारी पहुंची लक्की ने सड़क में ट्राला लगाकर बहाने से उन्हें रोका। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से तीनों को दबोच लिया।

पीछा कर रहे अतिरिक्त थाना प्रभारी नादौन महेंद्र सिंह राणा भी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे एटीएम बदलकर निकाले 40 हजार रुपये बरामद कर लिए। पुलिस ने संतोष का एटीएम कार्ड भी बरामद कर लिया है।
विज्ञापन


नादौन पुलिस शातिरों से छानबीन में जुटी है ताकि ये पता लगाया जा सके कि वे इससे पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दे चुके हैं या नहीं। आरोपियों की पहचान विजय शर्मा पुत्र बालकिशन तथा सुरेश कुमार पुत्र माता प्रसाद दोनों जौनपुर उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।

इन दोनों ने चंडीगढ़ से गाड़ी किराये पर ली जिसे ड्राइवर अमरीक सिंह पुत्र लाभ सिंह चला रहा था। नादौन थाना प्रभारी जसबीर ठाकुर ने बताया कि तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया जाएगा तथा पुलिस रिमांड की सिफारिश की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इन लोगों से 40  हजार की राशि व संतोष कुमार का एटीएम बरामद किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों से बैंक से पैसे निकालने के अन्य मामलों को लेकर भी पूछताछ की जा रही है।

झनियारी के लक्की ने जिस होशियारी से तीनों शातिरों को स्थानीय लोगों की मदद से पकड़ा वह काबिलेतारीफ है। लक्की पर हमला भी हो सकता था। अगर शातिरों के पास हथियार होता तो उसे जख्मी कर फरार भी हो सकते थे।

यहां तक की उसकी जान भी जा सकती थी। मगर लक्की की चालाकी और स्थानीय लोगों का सहयोग काम आया। उसने एसएचओ से अपनी पहचान और दोस्ती होने का फर्ज अपनी जान पर खेलकर निभाया। पीडि़त संतोष ने लक्की और पुलिस का शुक्रिया अदा किया।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें