इक्कीस सौ करोड़ से ज्यादा के कर चोरी के बहुचर्चित टेक्नोमैक घोटाले में सीआईडी ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। सीआईडी ने कंपनी निदेशक समेत आठ के खिलाफ नाहन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट के अनुसार कंपनी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये करोड़ों की धोखाधड़ी की और आबकारी एवं कराधान विभाग के अफसरों की मिलीभगत से सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया।
मामले में सीआईडी जल्द कई आरोपियों के खिलाफ भी सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल कर सकती है। सीआईडी ने जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें कंपनी के तत्कालीन निदेशक विनय कुमार के अलावा प्लांट हेड त्रिलोचन बिसवाल, डीजीएम एकाउंट विवेक लाल, डीजीएम एकाउंट विवेक गुप्ता, डीजीएम स्टोर आरके सैनी, डीजीएम फाइनेंस हिमांशु गोयल, सुलेमान और अमित शामिल हैं।
इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने बिना माल तैयार किए फर्जी दस्तावेजों से बिलिंग की। इसी गलत बिलिंग से आबकारी अधिकारियों से मिलकर आरोपियों ने माल के टैक्स बैरियर से गुजरने का भी रिकॉर्ड तैयार करा लिया। इसी रिकॉर्ड के आधार पर कंपनी ने अपना भारी टर्नओवर दिखाते हुए बाद में बैंकों से करीब ढाई हजार करोड़ का लोन लिया।
हालांकि, जब सरकार को कर चोरी की जानकारी मिली तो इस दौरान कंपनी बंद कर प्रबंधन के सदस्य फरार हो गए। एडीजी सीआईडी अशोक तिवारी ने बताया कि मामले में अभी भी जांच जारी है और सप्लीमेंटरी चार्जशीट जल्द दाखिल होगी।