उधर, 25 मई की शाम झंडूता तहसील के गांव डाहड में जंगली सुअरों के लिए लगाए जाने वाले बारूद के गोले को चबाने से अपना जबड़ा खो चुकी गाय ने एक स्वस्थ बछडे़ को जन्म दिया है।
वहीं, राहत की खबर यह है कि गाय उपचार के बाद धीरे-धीरे ठीक हो रही है। हालांकि, पशु चिकित्सकों का कहना है कि गाय अब नॉर्मल दिनों की तरह ढेर सारा चारा एक साथ नहीं खा सकेगी।
लेकिन उसका जबड़ा इस काबिल हो जाएगा कि वह घास खा सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसे के समय गाय के पेट में बछड़ा था। ऐसे में ही उसके साथ यह हादसा हो गया। इस हादसे ने पशु पालक और उसके पूरे परिवार को झकझोर दिया।