रामपुर एरिया में स्थित एक नर्सिंग कॉलेज विवादों के घेरे में आ गया है। कॉलेज की एक प्रशिक्षु नर्स ने एक बच्चे को जन्म दिया है। इस घटना के बाद से कॉलेज प्रशासन सवालों के कटघरे में हैं।
बताया जा रहा है कि इस छात्रा को कुछ दिन पहले ही क्लास के दौरान पेट में दर्द हो गया था। लेकिन किसी को पता नहीं चला कि यह प्रसव पीड़ा है। सूत्रों के अनुसार हॉस्टल में ठहरी इस छात्रा को फिर से पेट में दर्द शुरू हो गया।
बाद में हॉस्टल वार्डन और दूसरी छात्राओं ने इसे अस्पताल में शिफ्ट किया जहां डॉक्टरों ने बताया कि यह गर्भवती है। यह सुनकर हॉस्टल प्रबंधन और दूसरी छात्राओं के होश उड़ गए।
अस्पताल में करवाई नॉर्मल डिलीवरी
इस छात्रा को अस्पताल में भर्ती किया गया जहां इसकी नॉर्मल डिलीवरी करवाई गई। कॉलेज पर कोई सवाल न उठे इसके लिए चुपचाप ही इसकी डिलीवरी करवाई गई।
साथ ही इसके परिजनों को भी सूचित किया गया। कॉलेज की छात्राओं में यह काफी चर्चा का विषय रहा। उधर, बदनामी से बचने के लिए कॉलेज प्रबंधन ने सभी छात्राओं को यह बात बाहर न बताने की अपील की।
मगर इसके बावजूद यह बात लीक हो गई। अब यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
कॉलेज प्रबंधन ने दिखाया बाहर का रास्ता
उधर, इस घटना के बाद बदनामी से बचने के लिए कॉलेज प्रबंधन ने छात्रा को बाहर निकाल दिया है। इसे बच्चे समेत उसके घर भेज दिया है।
सूत्रों के अनुसार इस छात्रा ने पिछले साल ही कॉलेज में दाखिला लिया था। अभी पढ़ाई आधी ही हुई है और अब इसे यह कॉलेज छोड़ना पड़ेगा।
उधर, कॉलेज प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। कॉलेज प्रबंधन से जब इस बारे में बात की गई तो प्रबंधन ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी छात्रा के बालिग होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
तो फिर चैकअप में क्यों नहीं चला पता
इस घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं। हर तीन महीने में हॉस्टल में ठहरने वाली छात्राओं का मेडिकल टेस्ट किया जाता है। इसमें पता किया जाता है कि कहीं कोई छात्रा प्रेगनेंट तो नहीं।
यह टेस्ट इसलिए किया जाता है ताकि पता चल सके कि घर में छुट्टी के दौरान कहीं छात्रा ने कोई गलत काम तो नहीं कर दिया। या कहीं शादी तो नहीं कर ली।
फिलहाल अब यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि यदि छात्रा का चैकअप हुआ तो फिर प्रेगनेंसी का पता क्यों नहीं चला। हॉस्टल वार्डन और दूसरी छात्राओं को इसकी भनक क्यों नही लगी? इसके अलावा क्या छात्रा ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाए थे? ये सभी सवाल अभी अनसुलझे हैं।