हिमाचल के कांगड़ा के बैजनाथ ब्लॉक की पंचायतों के लिए सोलर लाइटों, टूल किट और स्पोर्ट्स किट खरीदारी में करीब 18 लाख रुपये के घोटाले के आरोप में विजिलेंस थाना धर्मशाला ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया है।
विजिलेंस ने प्रारंभिक जांच के बाद बैजनाथ ब्लॉक के पूर्व बीडीओ राजीव सूद, ब्लॉक के जेई सुरेश दीक्षित, अश्वनी, देवराज, संजीव शर्मा और शिवानी टेलीकॉम फर्म के मालिक पर केस दर्ज किया है।
आरोपियों के खिलाफ बैजनाथ प्रीतनगर गांव के हरमीत सिंह ने 27 नवंबर 2015 को विजिलेंस थाना धर्मशाला में शिकायत दर्ज कराई थी। विजिलेंस ने प्रारंभिक जांच के बाद केस दर्ज करने के लिए अपने मुख्यालय को पत्र लिखा था।
मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद आईपीसी की धारा 420, 120बी और 13 (2) पीसी एक्ट के तहत 22 दिसंबर को केस दर्ज किया है। एसपी विजिलेंस बिमल गुप्ता ने केस दर्ज होने की पुष्टि की है।
विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार बीडीओ बीडीसी बैजनाथ के पैसे के 10 प्रतिशत भाग से ही सोलर लाइटें खरीद सकता था। लेकिन, उसने कथित रूप से नियमों की अवहेलना करते हुए सोलर लाइटों पर बीडीसी के पैसे का 80 प्रतिशत भाग खर्च कर दिया।
सोलर लाइटें लगाने वाली फर्म को कथित रूप से गलत तरीके से फायदा पहुंचाकर एक सोलर लाइट 2300 रुपये ज्यादा महंगी खरीदी गई। बैजनाथ ब्लॉक में सोलर लाइटें लगाने के लिए करीब 6 कोटेशन मांगी गई थीं। इनमें प्रथम दो फर्मों ने सबसे कम रेट भरा था।
महंगे रेट पर खरीदा सामान, जांच में खुलासा
आरोप है कि इसके बाद चौथे नंबर की कोटेशन भरने वाली शिवानी टेलीकॉम फर्म ने काफी समय बाद बीडीओ को साधारण पत्र लिखकर सोलर लाइटें सप्लाई के लिए आवेदन किया। आरोप है कि बीडीओ ने कम रेट वाली प्रथम की दो फर्मों को दरकिनार कर शिवानी टेलीकॉम फर्म को महंगे दाम की सोलर लाइटें खरीदने का सप्लाई ऑर्डर दे दिया।
ब्लॉक में करीब 700 सोलर लाइटें लगनी थीं। एक लाइट करीब 18 हजार रुपये की थी जो कथित रूप से करीब 2300 रुपये महंगी खरीदी गई। नियमानुसार कोटेशन देने वाली फर्मों का डेमो होना था। आरोप है कि इसमें सिर्फ शिवानी टेलीकॉम फर्म को बुलाया गया। वहीं, कथित रूप से एफिशिएंशी रिपोर्ट भी मनमर्जी से ब्लॉक के सिर्फ चार जेई से बनवाई गई।
इसमें न तो बिजली बोर्ड के अधिकारी, न बीडीसी मेंबर और न ही फर्म के मालिक को बुलाया गया। इसी बीच बीडीओ का ट्रांसफर हो गया। इसके बाद जब बीडीओ दोबारा बैजनाथ ट्रांसफर हुए तो फिर नियमों को दरकिनार कर शिवानी टेलीकॉम फर्म को सप्लाई ऑर्डर दे दिया गया। विजिलेंस जांच में दूसरी बार शिवानी टेलीकॉम फर्म की ओर से दिए गए कोटेशन के दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके अलावा वोकेशन ट्रेनिंग के लिए टूल किट और स्पोर्ट्स किट की खरीद में भी कथित रूप से अनियमितताएं बरते जाने का आरोप है।