नकली दांतों से अगर आपको परेशानी है तो डेंटल इंप्लांट के जरिये नए दांत फिट कर सकते हैं। इससे आपको बार-बार दांतों को निकालने और उसकी सफाई करने की दिक्कतें नहीं झेलनी पड़ेंगी। डेंटल कॉलेज शिमला में पेरियोडोंटोलॉजी, ओरल सर्जरी और प्रोस्थोडोटिंक्स के डॉक्टर आपकी इसमें मदद करेंगे।
डॉक्टरों के मुताबिक मुंह के ऊपर और नीचे के जबड़े का आकार अलग-अलग होता है। ऐसे में नकली दांतों को जब लगाया जाता है तो दांतों से चबाया जाने वाला खाना बेस्वाद लगता है। इन्हें बार-बार खोलकर साफ भी करना पड़ता है। पेरियोडोंटोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. परवेश झिंगटा और सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक शर्मा ने डेंटल इंप्लांट की इस पद्धति में नया शोध करने का दावा किया है। इसे इंडियन सोसायटी ऑफ इंप्लाटोलाजिस्ट के राष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित भी किया जा चुका है।
डॉक्टरों का कहना है कि इस नई तकनीक से हड्डियों के हिस्से में स्क्रू को इंप्लाट किया जाएगा। सर्जरी से करीब तीन महीने तक इसे खाली छोड़ दिया जाता है। इसके बाद नकली दांतों को इंप्लांट किया जाता है। इस तरह से दांत लगाने से लोगों को बार-बार दांत निकालकर सफाई करने की जरूरत नहीं है। डेंटल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशु गुप्ता ने पेरियोडोंटोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की उपलब्धि पर बधाई दी है।