इंग्लैंड में महिला वर्ल्ड कप खेलने के बाद राजधानी शिमला लौटी सुन्नी के गढेरी गांव की बेटी सुषमा वर्मा का उसके स्कूल पोर्टमोर में जोरदार स्वागत हुआ। यहां करीब पांच घंटे तक चले सम्मान समारोह में प्रिंसिपल निशा भलूनी ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर उसे स्कूल की शान करार दिया।
प्रधानाचार्य ने कहा कि सुषमा स्कूल की छात्राओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत रहेंगी। इस दौरान सुषमा, उसके पिता भोपाल सिंह वर्मा और मामा मस्त राम वर्मा को भी सम्मानित किया गया। सुषमा के स्वागत में स्कूल की छात्राओं ने कई घंटों तक एक से बढ़कर एक रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।
कहा- कभी सोचा नहीं था इतना सम्मान मिलेगा
सुषमा ने कहा कि कभी सोचा नहीं था उन्हें इतना सम्मान मिलेगा। सुबह साढ़े दस बजे से तीन बजे तक चले कार्यक्रम में सुषमा ने स्कूल के शिक्षकों और छात्राओं के साथ सेल्फी ली। वहीं सुषमा के साथ स्कूल की छात्राओं ने वॉलीबाल, बैडमिंटन, हैंडबॉल जैसे मैच भी खेले।
सुषमा के बारहवीं कक्षा में 2008-09 में शारीरिक शिक्षक रहे ललित चौहान, प्रमोद चौहान और तत्कालीन लैब अटेंडेंट राजेश शर्मा भी पहुंचे। सुषमा ने स्कूल की छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए कहा कि एक लक्ष्य तय कर उसे पाने के लिए की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। सुषमा और उसके परिजनों के लिए पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन शाकली, ओगले, पतीड़ आदि खाने को दिए गए।
डीएसपी पद के लिए ऑफर मिलने पर परिवार से लूंगी राय
इंग्लैंड में महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने के बाद राजधानी शिमला में सम्मान पाकर भारतीय टीम की विकेटकीपर और बल्लेबाज सुषमा वर्मा फूली नहीं समाईं। हिमाचल पुलिस में डीएसपी का पद संभालने के सवाल के जवाब में कहा कि फिलहाल उन्हें सोशल मीडिया से ही यह जानकारी मिली है।
सरकार की ओर से कोई पत्र या सूचना उन्हें नहीं मिली है। ऑफर आता है तो वे अपने परिवार से राय लेने के बाद ही फैसला लेंगी। घर के पास कौन सेवा नहीं देना चाहता। सुषमा ने पोर्टमोर स्कूल में आयोजित सम्मान समारोह में मीडिया से बातचीत में कहा कि खेलों में उसे अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले, इसीलिए वह गांव के स्कूल से जमा दो में पोर्टमोर आई थी।
स्कूल में उन्होंने हालांकि बैडमिंटन, वॉलीबाल जैस खेलों में हिस्सा लिया, मगर क्रिकेट अकादमी ज्वाइन करने से उसके जीवन की दिशा ही बदल गई। छात्राओं को संदेश दिया कि खेल ही नहीं, जीवन में कुछ भी पाना है तो लक्ष्य तय कर आगे बढ़ें। मेहनत करें।
फाइनल में अच्छा प्रदर्शन न करने का मलाल
इंग्लैंड के साथ फाइनल मैच के दौरान सुषमा ने कहा कि शुरुआत में भारत का अच्छा प्रदर्शन रहा, मगर अंतिम दस ओवर में भारतीय टीम दबाव को झेल नहीं पाई। यदि मैं तीन ओवर तक क्रीज पर टिक जाती तो जीत हमारी होती। सुषमा ने कहा कि मेरा बैड लक था कि मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, उसका मलाल है।
सुषमा ने क्रिकेट के लिए प्रदेश में कुछ करने के सवाल पर कहा कि मैंने अभी इतना कुछ किया नहीं कि मैं कुछ कर सकूं। अभी जीवन में बहुत कुछ करना है। धोनी से सुषमा की तुलना किए जाने के एक सवाल पर सुषमा ने कहा कि मुझे अच्छा लगता है कि मेरी तुलना इतने बड़े क्रिकेट स्टार से की जा रही है। उन्हें अपना आदर्श मान मैं भी भारत को वर्ल्ड कप दिलाने का सपना देखती हूं।